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गुरुग्राम में खुलेगा दुनिया का सबसे बड़ा कैमरा संग्रहालय

जल्द ही गुरुग्राम में दुनिया का सबसे बड़ा कैमरा म्यूज़ियम बनने वाला है, जो पूरी तरह से फोटोग्राफी और कैमरे के इतिहास से जुड़ा होगा. 
•    कैमरा एक ऐसा उपकरण है, जो आजकल हर जगह मौजूद है. 
•    इसकी मदद से पुराने ज़माने की कुछ खास घटनाओं को तस्वीरों के रूप में आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए कैद करके रखा गया है.
•    इस म्यूज़ियम को 'द म्युजियो कैमरा- सेंटर ऑफ़ फोटोग्राफी' नाम दिया गया है. 
•    इसका निर्माण आदित्य आर्य (जिनका अपना खुद का एक आकर्षक विंटेज कैमरा म्यूज़ियम है) और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ गुरुग्राम के सहयोग से किया जा रहा है. 
•    आर्य के पास इस म्यूज़ियम को खोलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है और उनका कैमरों का कलेक्शन दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है. 
•    वर्तमान में उनके पास 600 से 700 तरह के मॉडल्स के कैमरे हैं. इनमें से कुछ उन्होंने खरीदे हैं तो कुछ उनको गिफ्ट में मिले हैं. 
•    इनके पास हर साइज़, आकार और बेहद पुराने कैमरों का कलेक्शन है.
•    म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन इस अनोखे म्यूज़ियम का उद्घाटन 19 अगस्त को, जो विश्व में 'वर्ल्ड फोटोग्राफी डे” के दिन के रूप में जाना जाता है, के दिन ही करने की योजना बना रही है. 
•    आदित्य आर्य के घर के बेसमेंट में बने छोटे से संग्रहालय में उनके द्वारा की गई फोटोग्राफी के कई बेहद रोमांचक पल फोटोज़ के रूप में रखे हुए हैं.

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भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था की तैयारियों में 91वें पायदान पर

डिजिटल अर्थव्यवस्था और समाज में बदलने की तैयारियों की वैश्विक सूची में भारत पिछड़कर 91वें स्थान पर पहुंच गया है। इस सूची में सिंगापुर शीर्ष पर है।

•    अन्य प्रमुख बाजारों में भी भारत पीछे है। रूस इस सूची में 41वें स्थान पर है। 
•    उसके बाद चीन पिछली बार से तीन स्थान चढ़कर 59वें, दक्षिण अफ्रीका 10 स्थान चढ़कर 65वें तथा ब्राजील 72वें स्थान पर है।
•    जिनीवा स्थित विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) द्वारा आज जारी सालाना नेटवक्र्ड रेडिनेस इंडेक्स के अनुसार सिंगापुर इस सूची में एक बार फिर शीर्ष पर रहा है। 
•    वहीं फिनलैंड दूसरे स्थान पर कायम है। इस सूची में शीर्ष दस स्थानों पर जो अन्य देश शामिल हैं उनमें स्वीडन, नॉर्वे, अमेरिका, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन, लग्जमबर्ग तथा जापान हैं।
•    यह इंडेक्स डब्ल्यूईएफ की वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी रिपोर्ट का हिस्सा है। 
•    इसमें विभिन्न देशों का आकलन डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा समाज के लिए तैयारियों के आधार पर किया गया है।
•    यह लगातार चौथा साल है जबकि भारत इस सूची में नीचे आया है। 2015 में भारत 89वें स्थान पर था, 2014 में 83वें तथा 2013 में 68 वें स्थान पर था। 
•    जहां राजनीतिक तथा नियामकीय वातावरण के हिसाब से भारत की स्थिति सुधरी है और वह 78वें स्थान पर रहा है लेकिन कारोबार तथा नवोन्मेषण वातावरण के हिसाब से भारत 110वें स्थान पर फिसल गया है।

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रिजर्व बैंक ने सुदर्शन सेन को कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया

सुदर्शन सेन को आज भारतीय रिजर्व बैंक ने कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया है। वे एन. एस. विश्वनाथन का स्थान लेंगे जिन्हें केंद्रीय बैंक का डिप्टी गवर्नर चुना गया है।
•    रिजर्व बैंक ने एक विज्ञप्ति में बताया कि सेन ने आज अपना पदभार संभाल लिया है।
•    सेन केंद्रीय बैंक में बैंकिंग विनियमन विभाग, सहकारी बैंक विनियमन विभाग और गैर बैंकिंग विनियमन विभाग का कार्यभार देखेंगे।
•    इससे पहले सेन बैंक में बैंकिंग विनियमन विभाग के प्रभारी थे। वह रिजर्व बैंक के अहमदाबाद क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक के तौर पर भी कार्य कर चुके हैं।
•    सेन ने ब्रिटेन के बर्मिंघम विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग एवं फाइनांस में एमबीए की डिग्री प्राप्त की है।
•    भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केन्द्रीय बैंक है। यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है। रिजर्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्त्रित करता है।
•    इसमें कहा गया है कि आईआईटी, मुंबई से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में बीटेक और सिस्टम्स एंड कंट्रोल में एमटेक करने वाले ढेकने वर्ष 1983 में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र से जुड़े थे।
•    ढेकने के पास प्रक्षेपण यान के नियंत्रण, सॉफ्टवेयर के विकास, मिशन की योजना बनाने और विश्लेषण का लंबा और व्यापक अनुभव है।
•    इसरो जड़त्वीय प्रणाली इकाई (आईआईएसयू) लांच वाहनों और अन्तरिक्ष यानों के लिए जड़त्वीय प्रणाली के क्षेत्र में कर्यरत एक उत्कृष्ट केंद्र है। 
•    आईआईएसयू में जड़त्वीय संवेदकों व प्रणालियों तथा उनसे संबंधित उपग्रह धटकों के क्षेत्र में अनुसंधान तथा विकास कार्य किए जाते हैं। 
•    यहां पर परिशुद्ध निर्माण, संयोजन, एकीकरण और परीक्षण के लिए स्वच्छ कक्ष की सुविधा उपलब्ध है। 
•    यह यूनिट संपूर्ण भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के वास्ते जड़त्वीय प्रणालियों के डिजाइन, इंजीनियरी, विकास व उन्हें निष्पादन योग्य बनाकर उपलब्ध कराने में सक्षम है।

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जवाहरलाल नेहरु बंदरगाह प्रत्येक कंटेनर की रेडियो टैगिंग करने वाला देश का पहला बंदरगाह बना

जवाहरलाल नेहरु बंदरगाह 1 जुलाई 2016 को प्रत्येक कंटेनर की रसद का रेडियो टैगिंग एवं लॉजिस्टिक डाटा रखने वाला देश का पहला बंदरगाह बना.

इससे आयात-निर्यात करने वाले व्यापारियों को उनके द्वारा मंगाई/भेजी गयी रसद की जानकारी रखना सुगम होगा.
•    प्रत्येक कंटेनर के साथ एक रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग (आरएफआईडी) लगाया जायेगा. इससे किसी भी स्थान पर मौजूद कंटेनर के स्थान की उचित जानकारी प्राप्त हो सकेगी.
•    इससे रेल अथवा रोड द्वारा भेजे जाने वाले कंटेनरों की आवाजाही पर पारदर्शिता बनी रहेगी. 
•    सप्लाई चेन के माध्यम से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों द्वारा रियल टाइम जानकारी दी जा सकेगी.
•    इससे समय की बचत होगी तथा लेन-देन की लागत तथा व्यापारियों की सुगमता हेतु मार्ग प्रशस्त होगा.
•    यह भारत का सबसे बड़ा बंदरगाह है.
•    यह महाराष्ट्र स्थित मुंबई के पूर्व में है. यह अरब सागर में स्थित है तथा यहां तक पहुंचने के लिए ठाणे क्रीक का सहारा लेना पड़ता है.
•    इसे न्हावा शेवा बंदरगाह के नाम से भी जाना जाता है.
•    इसका यह नाम न्हावा और शेवा नाम से नजदीकी गांवों के कारण रखा गया.
•    यह पोर्ट भारतीय रेलवे द्वारा प्रस्तावित वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के रूप में भी जाना जाता है.

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स्पेसक्राफ्ट 'जूनो' पांच साल का सफर पूरा कर जूपिटर ऑर्बिट में पहुंचा

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का स्पेसक्राफ्ट 'जूनो' पांच साल का लंबा सफर तय कर जूपिटर (बृहस्पति) की कक्षा में पहुंच गया है. जूनो के चीफ साइंटिस्ट स्कॉट बोल्टन के अनुसार यह नासा का सबसे मुश्किल काम था. यान ने 05 जुलाई 2016 रात 11 बजकर 53 मिनट पर (अंतरराष्ट्रीय समयानुसार तड़के तीन बजकर 53 मिनट पर) बृहस्पति की कक्षा में प्रवेश किया.
मानवरहित अंतरिक्षयान जूनो पांच साल पहले फ्लोरिडा के केप केनवेराल से प्रक्षेपित किया गया.
•    मानवरहित अंतरिक्षयान जूनो अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा सौर मंडल के पाँचवे ग्रह, बृहस्पति, पर अध्ययन हेतु 5 अगस्त 2011 को पृथ्वी से छोड़ा गया एक अंतरिक्ष शोध यान है.
•    जूनो टेनिस कोर्ट के आकार जैसा एक अंतरिक्ष यान है.
•    इसका भार लगभग साढ़े तीन टन है.
•    जूनो बृहस्पति के आस-पास ऐसी परिक्रमा कक्षा में स्थान लेगा जो इसे उस ग्रह के ध्रुवों के ऊपर से ले जाया करेगी.
•    इस पर हाइड्रोजन धातु के रूप में मौजूद है.
•    जूपिटर की कक्षा में पहुंचने के लिए जूनो ने 5 वर्षों में करीब 280 करोड़ किलोमीटर का सफर तय किया.
•    जूनो यान की एवरेज स्पीड 38 हजार किलोमीटर प्रति घंटा है.
•    लेकिन जूपिटर के करीब पहुंचने पर इसकी रफ्तार 2 लाख 66 हजार किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी.
•    नासा का यह जूनो स्पेसक्राफ्ट बृहस्पति ग्रह की बनावट, वहां के मौसम, चुंबकीय क्षेत्र की जानकारी पृथ्वी की ओर ट्रांसमिट करेगा.
•    जूनो यह भी पता लगाने की कोशिश करेगा कि क्या गैस जायंट माने जाने वाले जूपिटर प्लैनेट की गैस की परत के नीचे कोई पथरीला केंद्र है या नहीं.
•    फरवरी 2018 तक इस यान का ग्रह की खोज का अभियान पूरा होगा.
•    फरवरी 2018 में, ग्रह की 37 परिक्रमाएँ पूरी होने पर इस यान को धीमा कर के बृहस्पति के वायुमंडल में घुसाकर ध्वस्त कर दिया जाएगा.
•    वातावरण में आक्सीजन और हाइड्रोजन की मात्राओं का अध्ययन करके पानी की मात्रा का भी अंदाज़ा लगाने का प्रयास किया जाएगा.
•    जूनो के सामने चुनौती बृहस्पति ग्रह के भयानक बादलों को घेरे हुए इसके विकिरण बेल्ट में सही दशा-दिशा में बने रहने की है.
•    उल्लेखनीय है कि इस अभियान से 20 साल पहले 1996 में गेलेलियो मिशन को बृहस्पति ग्रह पर भेजा गया था.
•    बृहस्पति (ज्यूपिटर) एक टाइम कैप्सूल की तरह है.
•    बृहस्तपति यानी जूपिटर हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है.
•    रोमन सभ्यता ने अपने देवता जूपिटर के नाम पर इसका नाम रखा.
•    जूपिटर एक चौथाई हीलियम के साथ मुख्य रूप से हाईड्रोजन से बना हुआ है.
•    बृहस्पति ग्रह का आकार 1300 पृथ्वियों के बराबर है. जबकि इसका वज़न पृथ्वी से 360 गुना ज्यादा है.
•    यह कोई ज़मीन यानी सरफेस नहीं है, बल्कि ये मूल रूप से गैस से बना ग्रह है.
•    ग्रह पर गैस की अधिकता की वजह से इसे 'गैस जायंट' भी कहा जाता है.
•    यह चार गैसीय ग्रहों में (सैटर्न, यूरेनस, नेप्च्यून, जूपिटर) में सबसे बड़ा है.
•    1 अरब डॉलर से अधिक लागत वाले इस अभियान का उद्देश्य बृहस्पति के विकिरण बेल्ट में प्रवेश करते हुए इस ग्रह का अध्ययन एवं विश्लेषण करना है.
•    जूनो बृहस्पति के कोर का पता लगाने के लिए उसके चुंबकीय और गुरुत्वीय क्षेत्रों का नक्शा खींचेगा.
•    साथ ही यह ग्रह की बनावट, तापमान और बादलों को भी मापेगा और पता लगाएगा कि कैसे इसकी चुंबकीय शक्ति वातावरण को प्रभावित करती है.
•    इसका द्रव्यमान पृथ्वी की तुलना में 300 गुना अधिक है इसलिए इसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र अत्यंत प्रबल है.
•    जिसके कारण यह इस पर मौजूद सभी सामग्रियों को धारण किए हुए है.
•    इसके अध्ययन से हमारे सौर तंत्र के विकास के विषय में जानकारी मिल सकती है.

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प्रधान मंत्री ने केबिनेट में 19 नए मंत्री शामिल किए

नरेंद्र मोदी ने 05 जुलाई 2016 को कैबिनेट में 10 राज्यों से 19 नए मंत्रियों को शामिल किया. एन्वायरन्मेंट मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर को राज्य मंत्री से प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. पांच पुराने मंत्रियों निहालचंद, रामशंकर कठेरिया, सांवरलाल जाट, मनसुखभाई डी. वासवा और एमके. कुंदरिया ने इस्तीफा दिया.
•    फग्गन सिंह कुलस्ते - ये एक प्रमुख आदिवासी नेता होने के साथ साथ मध्य-प्रदेश के बरबटी से सांसद हैं।
•    सुरेंद्रजीत सिंह अहलूवालिया - ये दार्जिलिंग से सांसद हैं।
•    रमेश चंदप्पा जिग्जिनगी - रमेश एक दलित नेता होने के साथ साथ बीजापुर, कर्नाटक से (पांच बार) लोकसभा सांसद रह चुके हैं
•    विजय गोयल - वह दिल्ली से भाजपा के नेता है लेकिन इन्हें राजाथान से राज्यसभा के लिए चुना गया।
•    रामदास अठावले - वह रिपब्लिकन पार्टी के मुखिया हैं और इन पार्टी से एकमात्र राज्यसभा सदस्य हैं । 
•    राजेन गोहैन - राजेन असम से भाजपा के सांसद हैं । 
•    अनिल माधव दवे - ये मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं और साथ ही एक पर्यावरणविद हैं ।
•    परषोत्तम रूपाला - ये गुजरात से राज्यसभा सांसद हैं ।
•    एमजे अकबर - मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं ।
•    अर्जुन राम मेघवाल - ये बीकानेर, राजस्थान से लोकसभा सांसद हैं
•    जसवंत सिंह भाभोर - ये एक आदिवासी नेता होने के साथ साथ गुजरात में दाहोद विधानसभा के सदस्य हैं ।
•    डॉ महेंद्र नाथ पांडेय - ये चंदौली, उत्तर प्रदेश से भाजपा के लोकसभा सांसद हैं । 
•    अजय टम्टा - ये चुनावी क्षेत्र अल्मोड़ा से लोकसभा सदस्य है
•    कृष्णा राज - ये एक दलित नेता होने के साथ साथ उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से लोकसभा सदस्य है।
•    मनसुख मंडविया - गुजरात में भावनगर के निवासी हैं और गुजरात से ही राज्यसभा सांसद हैं ।
•    अनुप्रिया सिंह पटेल - ये उत्तर-प्रदेश मिर्जापुर से लोकसभा सांसद हैं
•    सी आर चौधरी - ये नागौर, राजस्थान से भाजपा के सांसद हैं।
•    पी पी चौधरी - ये पाली, राजस्थान से लोकसभा सांसद हैं और साथ ही ये ओबीसी जाती के अंतर्गत आते हैं ।
•    डॉ सुभाष भामरे -  ये धुले, महाराष्ट्र से भाजपा के लोकसभा सांसद हैं ।
मोदी सरकार में शामिल सभी नए मंत्रियों को विभिन्न क्षेत्रों से लिया गया है जिनके पास अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़ा पुराना अनुभव है. 
वहीं सुभाष राम राव भामरे कैंसर के मशहूर डॉक्टर हैं. एम जे अकबर लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं देते रहे हैं और वो पूर्व में संपादक भी रह चुके हैं जिन्हें अंतराष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारिता के लिए कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है. 
नई प्रतिभाओं और नए आइडिया को मौका देने के लिए कैबिनेट में युवाओं को भी जगह दी है. अनुप्रिया पटेल और रामदास आठवले के अलावा मंत्री बनाए गए सभी नेता भाजपा से हैं।

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सुपरमैन सीरीज़ की प्रसिद्ध अभिनेत्री नोएल नील का निधन

सुपरमैन सीरीज़ की प्रसिद्ध अभिनेत्री नोएल नील का एरिज़ोना स्थित उनके आवास पर लम्बी बीमारी के बाद 3 जुलाई 2016 को निधन हो गया. वे 95 वर्ष की थीं.
•    टेलीविज़न सीरीज़ में सुपरमैन सीरीज़ में लुइस लेन का महत्वपूर्ण किरदार निभा चुकी नील ने अपने किरदार एवं अभिनय के कारण प्रसिद्धी बटोरी थी.
•    नोएल नील का जन्म 25 नवम्बर 1920 को मिनीपोलिस में हुआ, उनके पिता मिनीपोलिस स्टार ट्रिब्यून में जर्नलिस्ट थे.
•    हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करके उन्होंने कैलिफ़ोर्निया जाकर बतौर गायक की नौकरी की.
•    1940 के दशक में उन्होंने विभिन्न फिल्मों में काम किया लेकिन उनमें उन्हें विशेष प्रसिद्धी प्राप्त नहीं हुई.
•    वर्ष 1948 में नील को कोलंबिया पिक्चर्स से एक टीवी सीरीज़ में काम करने का अवसर मिला जिसमें उन्हें एक ऐसे व्यक्ति की प्रेमिका, लुईस लेन, का किरदार निभाना था जो किसी अन्य ग्रह का था, उसमें असाधारण शक्तियां थी एवं उस पर गोलियों का भी असर नहीं होता था. इस किरदार का नाम सुपरमैन रखा गया.
•    किर्क एलेन ने सुपरमैन का किरदार निभाया जबकि नील ने डेली प्लेनेट में कार्यरत लुईस लेन का किरदार निभाया.
•    यह टीवी सीरीज़ 1958 तक चली, वर्ष 1978 में क्रिस्टोफर रीव बतौर सुपरमैन किरदार में नज़र आये एवं नोएल नील लुईस लेन की मां के किरदार में नज़र आयीं.

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भारत इस सप्ताह ब्रिक्स के नशा विरोधी देशों की मेजबानी करेगा

भारत नार्को आतंकवाद और काले धन को वैध करने के लिए संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए ब्रिक्स देशों के नशा विरोधी एजेंसियों के प्रमुखों की मेजबानी करने जा रहा है।
•    इसमें ब्राजील-रूस-भारत-चीन-दक्षिण अफ्रीका के साथ आयोजित किया जाएगा।
•    8 जुलाई, 2016 को एक दिवसीय बैठक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा आयोजित किया जाएगा।
•    उच्च स्तरीय बैठक के एजेंडे में व्यापारियों और रसायनों के मोड़, नया साइकोएक्टिव  पदार्थों के उपयोग सहित अवैध नशीली दवाओं की तस्करी के बारे में चर्चा होगी ।
•    यह भी ध्यान दिया जाएगा की समुद्री रास्तों से नशीले पदार्थों की तस्करी, नार्को आतंकवाद और नशीली दवाओं के काले धन को बढ़ावा न मिले ।
•    सभी ब्रिक्स देश प्रभावी ढंग से इन मुद्दों से साथ निपटने के लिए और अवैध नशीले पदार्थों पर  प्रभावी निगरानी रखने के लिए सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।
•    भारत ने 2012 के बाद दूसरी बार ब्रिक्स अध्यक्षता में कार्यभार संभाल लिया है।
•    इसका आयोजन अक्टूबर 2016 में गोवा के आठवें वार्षिक शिखर सम्मेलनमें किया जाएगा ।

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नासा ने न्यू होराइजन स्पेस मिशन को क्विपर बेल्ट तक बढ़ाया

नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा)  क्विपर बेल्ट में गहरी जांच करने के लिए नए क्षितिज मिशन के लिए अपनी मंजूरी दे दी
•    प्लूटो के पास से गुजरने की ऐतिहासिक सफलता मिलने के बाद नासा का न्यू होराइजन मिशन अंतरिक्ष की गहराइयों में उड़ान भरेगा। 
•    यह मिशन अंतरिक्ष में उस प्राचीन पिंड की तरफ बढ़ेगा जिसे सौर प्रणाली निर्माण का शुरुआती ब्लॉक माना जाता है।
•    कुइपर बेल्ट की गहराई में स्थित पिंड तक अंतरिक्ष यान 1 जनवरी 2019 पहुंच सकता है। यही इसका निर्धारित समय है। 
•    कुइपर बेल्ट को 2014 एमयू69 के नाम से जाना जाता है। नासा के ग्रह विज्ञान निदेशक जिम ग्रीन ने कहा, 'प्लूटो के लिए न्यू होराइजन मिशन हमारे अनुमान से आगे निकल गया है और आज भी अंतरिक्ष यान के आंकड़े हैरत पैदा कर रहे हैं।'
•    जुलाई 2016 के पहले सप्ताह में नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने एक रहस्यमय वस्तु क्विपर बेल्ट में गहरी जांच करने के लिए नए क्षितिज मिशन को अपनी मंजूरी दे दी है।
•    इस मिशन में  2014 MU69 नामक वस्तु का पता लगाया  जाएगा।
•    उम्मीद है कि नया क्षितिज 31 दिसम्बर 2018 या 1 जनवरी 2019 तक 2014 MU69 तक पहुंच जाएगा।
•    2014 MU69 शुरू में क्रमश: नए क्षितिज और हबल टीमों द्वारा PT1 और 1110113Y के नाम से जाना जाता था ।
•    2014 MU69 एक प्राचीन वस्तु और सौर प्रणाली के प्रारंभिक निर्माण ब्लॉकों में से एक माना जाता है।
•    इसे अगस्त 2015 में नए क्षितिज 'लक्ष्य के रूप में चयनित किया गया था।
•    अक्टूबर और नवंबर 2015 में चार बार रास्तों  में परिवर्तन करने के बाद, नया क्षितिज 2014 MU69 की राह पर है। 
•    जिसकी खोज अंतरिक्ष यान लांच होने तक नहीं की जा सकी थी विज्ञान उसे सामने लाने में जुटा है।
•    नए क्षितिज केप केनवरल एयर फोर्स स्टेशन से 19 जनवरी 2006 को शुरू किया गया था।
•    14 जुलाई 2015, इसे प्लूटो की सतह से ऊपर 12500 किमी उड़ान भरी, 

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एम. वी. ढेकने ने आईआईएसयू के निदेशक का पदभार संभाला

जाने-माने वैज्ञानिक एम. वी. ढेकने ने वट्टीयूरकावु में अंतरिक्ष विभाग के इसरो जड़त्वीय प्रणाली यूनिट आईआईएसयू के निदेशक का पदभार संभाल लिया है। 
•    एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ढेकने ने एक जुलाई को पदभार संभाला। वह आईआईएसयू के सातवें निदेशक बनाए गए हैं। 
•    इसमें कहा गया है कि आईआईटी, मुंबई से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में बीटेक और सिस्टम्स एंड कंट्रोल में एमटेक करने वाले ढेकने वर्ष 1983 में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र से जुड़े थे।
•    ढेकने के पास प्रक्षेपण यान के नियंत्रण, सॉफ्टवेयर के विकास, मिशन की योजना बनाने और विश्लेषण का लंबा और व्यापक अनुभव है।
•    इसरो जड़त्वीय प्रणाली इकाई (आईआईएसयू) लांच वाहनों और अन्तरिक्ष यानों के लिए जड़त्वीय प्रणाली के क्षेत्र में कर्यरत एक उत्कृष्ट केंद्र है। 
•    आईआईएसयू में जड़त्वीय संवेदकों व प्रणालियों तथा उनसे संबंधित उपग्रह धटकों के क्षेत्र में अनुसंधान तथा विकास कार्य किए जाते हैं। 
•    यहां पर परिशुद्ध निर्माण, संयोजन, एकीकरण और परीक्षण के लिए स्वच्छ कक्ष की सुविधा उपलब्ध है। 
•    यह यूनिट संपूर्ण भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के वास्ते जड़त्वीय प्रणालियों के डिजाइन, इंजीनियरी, विकास व उन्हें निष्पादन योग्य बनाकर उपलब्ध कराने में सक्षम है।

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