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थाईलैंड माँ से बच्चे को एड्स से बचाने में सफल होने वाला एशिया का पहला देश बना

एशिया में थाईलैंड पहला देश बन गया है, जिसने एड्स पीड़ित मां से रोग का वाइरस बच्चे में जाने से रोकने में सफलता पाई है। 
•    इसी देश ने सिफिलिस बीमारी को भी आगे की पीढ़ी में बढ़ने से रोकने में सफलता पाई है।
•    यह घोषणा करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे जानलेवा बीमारी से लड़ाई में अहम सफलता बताया। 
•    थाईलैंड एशिया के सर्वाधिक एड्स प्रभावित देशों में से एक है।
•    थाईलैंड ने यह सफलता पीड़ित मां के लगातार टीकाकरण और वाइरस के बच्चे में जाने से रोकने के लिए तमाम प्रयास के बाद पाई है। 
•    बेलारूस और आर्मेनिया ने भी एड्स वाइरस को नई पीढ़ी से जाने में रोकने में सफलता पाई है। 
•    दोनों देशों में एचआइवी पीड़ित लोगों की संख्या बहुत कम है।
•    डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार क्यूबा अकेला देश है, जिसने मां से बच्चे में इस बीमारी को जाने से रोकने में सफलता पाई है। 
•    मां के एड्स होने की स्थिति में उसके बच्चे को यह बीमारी होने की 15 से लेकर 45 फीसद तक आशंका होती है। 
•    बच्चे को यह बीमारी जन्म से और मां के दुग्धपान से भी हो सकती है।

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सरकार ने मिशन इन्द्रधनुष में 4 नए टिके जोड़े

स्वास्थ्य मंत्रालय जल्द ही अपने प्रमुख प्रतिरक्षण कार्यक्रम 'मिशन इंद्रधनुष' में  नए टीके शामिल करेगा।

•    मिशन इंद्रधनुष के तहत मंत्रालय ने 201 उच्च फोकस जिलों के लगभग 50% बच्चों को टिके के लिए पहचान की है।
•    एक साल के समय में, 1.62 करोड़ बच्चों को अतिरिक्त टीकाकरण के दायरे में लाया गया है।
•    सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी राष्ट्रव्यापी प्रतिरक्षण अभियान के तहत वर्ष 2020 तक 90% शिशुओं का टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा है।
•    स्वास्थ्य मंत्रालय ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ बातचीत कर पैसे भी इकठ्ठा कर रही है 
•    मिशन इंद्रधनुष अभियान को भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय सभी बच्चों को टीकाकरण के अंतर्गत लाने के लिये "'मिशन इंद्रधनुष'" को प्रारंभ किया गया था 
•    इंद्रधनुष के सात रंगों को प्रदर्शित करने वाला मिशन इंद्रधनुष का उद्देश्य उन बच्चों का 2020 तक टीकाकरण करना है जिन्हें डिफ्थेरिया ,बलगम, टिटनस ,पोलियो ,तपेदिक ,खसरा तथा हेपिटाइटिस-बी आदि के टीके नहीं लगे हैं 

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विश्व बैंक ने महामारी इमरजेंसी वित्त सुविधा शुरू की

विश्व बैंक समूह ने महामारी इमरजेंसी वित्त सुविधा की है 
•    विश्व बैंक ने एक नये वित्तीय तंत्र की शुरूआत की है जो वैश्विक बीमारी फैलने से निपटने के लिए तैयारी में मदद करेगा .
•    महामारी किसी एक स्थान पर सीमित होती है। किन्तु यदि यह दूसरे देशों और दूसरे महाद्वीपों में भी पसर जाए तो उसे 'सार्वदेशिक रोग' कहते हैं। 
•    जिम योंग किम विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष हैं।
•    विश्व बैंक संयुक्त राष्ट्र की विशिष्ट संस्था है। 
•    इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों को पुनर्निमाण और विकास के कार्यों में आर्थिक सहायता देना है। 
•    विश्व बैंक समूह पांच अन्तर राष्ट्रीय संगठनो का एक ऐसा समूह है जो देशो को वित्त और वित्तीय सलाह देता है। इस्के उद्देश्य निम्न है -
•    विश्व को आर्थिक तरक्की के रास्ते पर ले जाना।
•    विश्व मे गरीबी को कम करना।
•    अंतरराष्ट्रीय निवेश को बढावा देना।
•    विश्व बैंक समूह के मुख्यालय वाशिंगटन में है। 
•    विश्व बैंक के एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था है कि ऋण प्रदान करता है है। 
•    पूंजी कार्यक्रमों के लिए विकासशील देशों के लिए. विश्व बैंक की आधिकारिक लक्ष्य गरीबी की कमी है। 

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भारत, एंटीबायोटिक दवाओं पर रेड लाइन अभियान की हुई तारीफ़

लाल अभियान के साथ दवाओं के रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर वैश्विक समीक्षा द्वारा सराहना की गई।
•    2014 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और अर्थशास्त्री जिम ओ'नील की अध्यक्षता में इसकी समीक्षा हुई थी  ।
•    समीक्षा के अनुसार, एंटीबायोटिक दवाओं पैकेजिंग के लिए लाल रेखा अभियान' के  तहत भारत अपने विचार दुनिया के समक्ष रखने के साथ साथ वो इस विचारधारा का नेतृत्व भी कर रहा है ।
•    अभियान फ़रवरी 2016 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था ।
•    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले दिनों सर्दी-खांसी और बुखार से लेकर मधुमेह तक के इलाज के लिए प्रयुक्त लगभग 350 दवाओं को प्रतिबंधित कर दिया़  
•    इनमें कुछ एंटीबायोटिक थीं, तो कई फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशनवाली दवाइयां. 
•    मंत्रालय का कहना है कि ये लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हैं और इनके सुरक्षित विकल्प मौजूद हैं. 
•    आजकल मामूली दिक्कतों पर एंटीबायोटिक्स लेना एक आदत बनती जा रही है, जो आगे चल कर कई परेशानियां पैदा करती हैं. 
•    दुनिया का पहला एंटीबायोटिक पेनिसिलिन, निमोनिया जैसी बीमारी में बेहद कारगर था़, सिर्फ एक खुराक में असर दिखानेवाली यह दवा, निमोनिया के अलावा कई अन्य बीमारियों में रामबाण मानी जाती थी, क्योंकि एंटीबायोटिक की खोज ही इसी से शुरू हुई थी़  लेकिन अब निमोनिया के लिए भी यह नाकाफी है, इसकी जगह मरीज को कई अन्य एंटीबायोटिक देने पड़ते हैं. 

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एड्स की महामारी को 2030 तक समाप्त करने के लिए तत्काल कार्रवाई की जरूरत : संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र ने 6 मई 2016 को ऑन द फास्ट – ट्रैक टू इंड द एड्स एपिडेमिक शीर्षक से नई रिपोर्ट जारी की.
•    रिपोर्ट के अनुसार बीते 15 वर्षों में की गई प्रक्रिया की असाधारण प्रगति का असर शून्य हो सकता है.
•    रिपोर्ट में बताया गया है कि 2004 में अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने के बाद एड्स संबंधी मौतों में हुई 42 फीसदी की कमी में तेजी से किए गए उपचार पैमाने की मुख्य भूमिका रही है.
•    हाल के वर्षों में एचआईवी से सबसे अधिक प्रभावित देशों में जीवन प्रत्याशा में तेजी से बढ़ोतरी हुई है.
•    रिपोर्ट में एचआईवी और एड्स पर 2011 की राजनीतिक घोषणा के कार्यान्वयन की खामियों को भी बताया गया है.
•    रिपोर्ट में ऐसे इलाकों पर ध्यान दिया गया है जहां एचआईवी संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं जैसे पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया.
•    वर्ष 2000 से 2014 के बीच इन इलाकों में एचआईवी के नए संक्रमण के मामलों में 30 फीसदी तक का इजाफा हुआ है 

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संयुक्त राष्ट्र ने जिका वायरस से बचाव के लिए मल्टी- पार्टनर ट्रस्ट फंड की शुरूआत की

संयुक्त राष्ट्र ने जिका  वायरस से बचाव के लिए मल्टी- पार्टनर ट्रस्ट फंड की शुरूआत की.
•    इस फंड की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने की थी।
•    फंड का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र प्रणाली और भागीदारों से एक समन्वित प्रतिक्रिया समर्थन करने के लिए एक तेजी से, लचीला और जवाबदेह मंच प्रदान करना है।
•    कुछ देशों में वायरस के प्रसार में हाल ही में वृद्धि देखि गयी थी 
•    जिका विषाणु फ्लाविविरिडए विषाणु परिवार से है। 
•    जो दिन के समय सक्रिय रहते हैं। इन्सानों में यह मामूली बीमारी के रूप में जाना जाता है, जिसे जिका बुखार, जिका या जिका बीमारी कहते हैं। 
•    1947 के दशक से इस बीमारी का पता चला। 
•    यह अफ्रीका से एशिया तक फैला हुआ है। 
•    यह 2014 में प्रशांत महासागर से फ्रेंच पॉलीनेशिया तक और उसके बाद 2015 में यह मेक्सिको, मध्य अमेरिका तक भी पहुँच गया।

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दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी रियो ओलंपिक्स में मच्छरों से बचाव वाले पोशाक के साथ खेलेंगे

दक्षिण कोरिया ने 27 अप्रैल 2016 को के दौरान मच्छरों से बचाव के लिए विशेष रूप से तैयार यूनिफार्म पहनने की घोषणा की 
•    ये कदम इसीलिए उठाया गया है ताकि जीका वायरस से बचाव हो सके.
•    दक्षिण कोरियन टीम की ड्रेस सियोल में जारी की गयी.
•    इस यूनिफार्म में शर्ट एवं ट्राउज़र शामिल हैं जिसे विशेष रूप से मच्छरों से बचाव हेतु बनाया गया है.  
•    खिलाड़ी कोई विशेष तरह के कपड़े नहीं पहन सकते लेकिन वे मच्छरों से बचाव हेतु क्रीम या अन्य उपाय कर सकते हैं.
•    यह निर्णय ब्राज़ील में जीका वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण लिया गया. \
•    ये बिमारी वायरस एडीस मच्छर द्वारा फैलता है.
•    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे वैश्विक आपातकाल घोषित किया. इससे नवजात शिशुओं को माइक्रोसेफली एवं अन्य मस्तिष्क संबंधी रोग हो सकते हैं. 
•    ब्राज़ील सरकार ने गर्भवती महिलाओं को खेलों के आयोजन स्थलों से दूर रहने की हिदायत जारी की है.

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डॉ जितेंद्र सिंह ने पूर्वोत्तर में कैंसर केयर अभियान की शुरूआत

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कैंसर के बारे में जागरुकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम तथा निदान के लिए शनिवार को पूर्वोत्तर परिषद सचिवालय (एनईसी) में 'पिंक चेन कैंसर कैंपेन' शुरू किया।
•    एनईसी और एक एनजीओ द्वारा आयोजित पिंक चेन कैंपने, हफ्ते भर का कार्यक्रम है, जो 29 अप्रैल तक चलेगा। 
•    मुहिम की शुरुआत करते हुए पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री सिंह ने कहा कि यह अभियान केवल मेघालय के लिए नहीं बल्कि पूरे पूर्वोत्तर के लिए है।

•    उन्होंने कहा, 'यह अभियान तब सफल होगा जब हम ऐसी स्थिति में पहुंच जाएंगे, जहां अब से कुछ साल बाद हमें इस तरह के कार्यक्रम की जरूरत नहीं पड़ेगी।'
•    डा. जितेंद्र सिंह ने अफसोस व्यक्त किया कि अनेक राज्यों की इस दिशा में प्रगति संतोषजनक नहीं रही है। 
•    उन्होंने कहा कि इस बैठक में जम्मू-कश्मीर से केरल तक के सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव उपस्थित हैं और यह आशा है कि वे अपने-अपने राज्यों में इस दिशा में आगे बढ़ने का संदेश ले जाएंगे। 
•    साक्षात्कार प्रथा समाप्त करने में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महाराष्ट्र , राजस्थान, तथा उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए डा. जितेंद्र सिंह ने दूसरे अन्य राज्यों के सचिवों को सलाह दी कि वे इसके लाभ को समझें और अपने-अपने राज्यों में इसे अपनाएं।

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