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    ग्रेट बैरियर रीफ 2016 के सर्वश्रेष्ठ स्थान घोषित

    ग्रेट बैरियर रीफ 2016 के सर्वश्रेष्ठ स्थान घोषित किया गया है. इसे छुट्टियों के लिए भी सर्वश्रेष्ठ स्थान माना गया है .
    •    ग्रेट बैरियर रीफ, क्वींसलैंड के उत्तरी-पूर्वी तट के समांतर बनी हुई, विश्व की यह सबसे बड़ी मूँगे की दीवार है।
    •    इस दीवार की लंबाई लगभग 1200 मील है। 
    •    यह कई स्थानों पर खंडित है एवं इसका अधिकांश भाग जलमग्न है, परंतु कहीं-कहीं जल के बाहर भी स्पष्ट दृष्टिगोचार होती है। 
    •    समुद्री तूफान के समय अनेक पोत इससे टक्कर खाकर ध्वस्त हो जाते हैं। 
    •    फिर भी, यह पोतचालकों के लिये विशेष सहायक है, क्योंकि दीवार के भीतर की जलधारा इस बृहत शैलभित्ति द्वारा सुरक्षित रहकर तटगामी पोतों के लिये अति मूल्यवान् परिवहन मार्ग बनाती है तथा पोत इसमें से गुजरने पर खुले समुद्री तूफानों से बचे रहते हैं।

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    उत्तरी अमेरिका में पहली बार डॉल्फिन के लिए अभयारण्य आरंभ किया जायेगा

    बाल्टिमोर राष्ट्रीय एक्वेरियम ने 15 जून 2016 को डॉल्फिन के लिए एक अभ्यारण्य बनाने की घोषणा की. यह उत्तरी अमेरिका में इन समुद्री स्तनधारियों के लिए पहला अभ्यारण्य होगा.
    अटलांटिक बॉटलनोज़ डॉल्फिन के इस एक्वेरियम को वर्ष 2020 तक खुले समुद्र में स्थानांतरित कर दिया जायेगा. इन आठ डॉलफिनों में (छह मादा एवं दो नर) केवल एक ही अब तक खुले समुद्र में रहने की अनुभवी है. 
    •    इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु फ्लोरिडा एवं कैरिबियन पर स्थान की तलाश की जा रही है.
    यह पूरी तरह संरक्षित स्थल होगा जहां इन जानवरों की प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा देखभाल की जाएगी.
    •    यह स्थल एक उष्णकटिबंधीय या उपोष्णकटिबंधीय स्थान पर स्थित होगा, यहां प्राकृतिक रूप से मछलियों, डॉल्फिन एवं समुद्री वनस्पति के लिए उपयुक्त स्थान होगा.
    •    वर्षों से डॉल्फिन के व्यवहार पर हो रही रिसर्च एवं पशु अधिकार संगठनों के आह्वान पर राष्ट्रीय एक्वेरियम को अभ्यारण्य में तब्दील किया जा रहा है. 
    •    पशु अधिकार संगठनों द्वारा डॉल्फिन को वर्षों तक एक ही सीमित स्थान पर रखने के पर एक्वेरियम की आलोचना की गयी.
    •    यह आमतौर पर समुद्र में पाई जाने वाली डॉल्फिन हैं, इनका रंग हल्का ग्रे एवं काला होता है.
    •    इनकी लम्बाई 6 फीट (1.8 मीटर) से 12 फीट (3.6 मीटर) तक हो सकती है तथा इसका वजन 1400 पाउंड (635 किलोग्राम) तक हो सकता है.
    •    इन आठ डॉल्फिनों में से एक, 1972 में जन्मीं नैनी, केवल इकलौती ऐसी डॉल्फिन है जो खुले समुद्र में पैदा हुई.
    •    इन डॉल्फिनों ने कभी खुले समुद्र में विचरण नहीं किया न ही वर्षा आदि का अनुभव लिया है.
    •    इन डॉल्फिनों को समुद्र में जीवन व्यतीत करने के गुण सीखने होंगे. वर्तमान दौर में समुद्र में प्रदूषण, शोर, जेलीफिश एवं लाल टाइड का भी खतरा काफी बढ़ गया है.
    उन्हें इस विशाल क्षेत्र में जीवनयापन करने का अनुभव महसूस करना होगा.

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    मानवीय कारणों के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन से यह पहला जीव है जिसे विलुप्त घोषित किया गया.

    क्वीन्सलैंड के डिपार्टमेंट ऑफ़ एनवायरनमेंट एंड हेरिटेज के वैज्ञानिक इयान गायन्थर द्वारा किये गये सर्वेक्षण की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी.
    •    जीव के विलुप्त होने का मुख्य कारण उच्च ज्वार एवं समुद्र का बढ़ता जलस्तर है. यह जलस्तर द्वीप पर भी मौजूद रहने लगा जिससे जीव के निवास स्थान के लिए खतरा पैदा हो गया.
    •    समुद्र के बढ़ते स्तर के कारण बहुत से जीव जंतु मारे गये. 
    •    इसे ऑस्ट्रेलियन ग्रेट बैरियर रीफ रोडेंट अथवा ब्रेंबल केय के नाम से भी जाना जाता है.
    •    यह मुरिडे परिवार से जुड़ा एक जीव था.
    •    यह केप यॉर्क मेलोम्यस जैसा दिखता था लेकिन इसमें कुछ आधारभूत प्रोटीन विभिन्नताए भी मजूद थीं.
    •    यह अधिकतर मैदानी इलाकों में पाया जाता था एवं वनस्पति भोजन पर निर्भर रहने वाला जीव था.
    •    यह ऑस्ट्रेलिया का अलग-थलग रहने वाला स्तनपायी जीव था.
    •    पहली बार इसकी खोज अप्रैल 1845 में की गयी. उस समय इसकी जनसँख्या काफी अधिक थी.

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    नॉर्वे वनों की कटाई को प्रतिबंधित करने के लिए दुनिया का पहला देश बन गया है

    नॉर्वे वनों की कटाई को प्रतिबंधित करने के लिए दुनिया का पहला देश बन गया है.यहाँ की संसद में ये फैसला लिया गया है की किसी भी तरह के ऐसे काम की अनुमति नहीं दी जाएगी जिसमे पेड़ों को काटना पड़े 
    •    नॉर्वे की संसद ने सरकार द्वारा वनों को नहीं काटे जाने के फैसले का भी समर्थन किया। नॉर्वे दुनियाभर में वनों के संरक्षण की योजनाओं के लिए पैसे मुहैया करता है। 
    •    इसके अलावा नॉर्वे वन्य समुदायों के लिए मानवाधिकार कार्यक्रमों का भी समर्थन करता है। 
    •    इसके साथ ही नॉर्वे अगले 10 साल में अपने यहां जीवाश्‍म ईंधनों जैसे पेट्रोल और डीजल से चलने वाली सभी कारों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर देगा। 
    •    इस तरह से पहले से ही पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर दुनिया के सबसे प्रगतिशील देशों में से एक नॉर्वे ने पर्यावरण के रक्षा की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
    •    बताया जा रहा है कि सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों में ही इस मामले में आपसी सहमति बन गई है। 
    •    यह तय किया गया है कि 2025 तक नॉर्वे में सभी कारें हरित ऊर्जा से चलाई जाएंगी।
    •    डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की 2007 की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक अमेज़न वर्षावन का लगभग 60 % हिस्सा पूरी तरह से खत्म हो सकता है 

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    गुवाहाटी द्वारा गंगा नदी की डॉल्फिन को ‘शहर जीव’ घोषित किया गया

    कामरूप मेट्रोपोलिटन जिला प्रशासन द्वारा गंगा नदी की डॉल्फिन को शहर का प्रतीक घोषित किये जाने पर असम स्थित गुवाहाटी 6 जून 2016 ‘शहर जीव’ वाला देश का पहला शहर बन गया.

    •    गंगा नदी की डॉल्फिन को स्थानीय भाषा में ‘सिहु’ भी कहा जाता है. गौरतलब है कि ब्रह्मपुत्र नदी में ऐसे 2000 से कम जीव बचे हैं.
    •    जिला प्रशासन ने शहर के प्रतीक के रूप में किसी जीव को चुनने हेतु ऑनलाइन और ऑफलाइन मतदान की व्यवस्था का आयोजन कराया. इस मतदान प्रक्रिया में गंगा नदी के डॉल्फिन के अतिरिक्त ब्लैक सॉफ्टशेल टर्टल (बोर कासो) कछुआ और ग्रेटर एडजुटैंड स्टोर्क (हरगिला) थे.
    •    तीन महीने तक चलाये गये इस मतदान अभियान में गंगा नदी की डॉल्फिन को कुल 60003 मतों में से 24247 वोट प्राप्त हुए.
    •    ग्रेटर एडजुटैंड स्टोर्क को 18454 जबकि ब्लैक सॉफ्टशेल टर्टल को 17302 मत मिले.
    •    कामरूप जिला प्रशासन ने असम वन विभाग, असम राज्य जैव-विविधता समूह एवं एक एनजीओ के साथ मिलकर यह मतदान आयोजित कराया.
    •    इन्हें गंगा का टाइगर भी कहा जाता है क्योंकि जिस प्रकार वनों में बाघ विचरण करते हैं उसी प्रकार डॉल्फिन नदी में रहती है.
    •    इसका साइंटिफिक नाम प्लाटानिस्टा गंगेटिका है.
    •    गंगा नदी की डॉल्फिन गहरे पानी में रहती हैं. यह अधिकतर दो नदियों के संगम स्थल पर पायी जाती हैं. इनके साथ मगरमच्छ, स्वच्छ पानी के कछुए एवं जलीय पक्षी भी देखे जा सकते हैं.
    •    इन्हें सात राज्यों – असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखण्ड एवं पश्चिम बंगाल में पाया जाता है.
    •    डॉल्फिन इन नदियों में पायी जाती हैं – गंगा, चम्बल (मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश), घाघरा, गंडक (बिहार एवं उत्तर प्रदेश), सोन एवं कोसी (बिहार), ब्रह्मपुत्र एवं सहायक नदियां सदिया से धुबरी एवं कुलसी नदी.
    •    गंगा नदी में पाई जाने वाली डॉल्फिन ताकतवर लेकिन लचीली होती है. इसका वजन 150 किलोग्राम तक होता है. मादा डॉल्फिन नर की अपेक्षा बड़ी होती हैं.
    •    गंगा नदी की डॉल्फिन साधारणतया नेत्रहीन होती हैं लेकिन वे अपना शिकार अल्ट्रासोनिक आवाज़ से पकड़ती हैं.
    •    गंगा नदी की डॉल्फिन के संरक्षण का कार्यक्रम वर्ष 1997 में आरंभ किया गया था ताकि इसकी घटती जनसंख्या पर नियंत्रण पाया जा सके.

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    वन्यजीवन के अवैध व्यापार पर शून्य सहनशीलता विषय के साथ विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया

    विश्व भर में 5 जून 2016 को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया. इस वर्ष का विषय था - वन्यजीवों के अवैध व्यापार पर शून्य सहनशीलता.
    वर्ष 2016 का मेजबान देश अंगोला था. गौरतलब है कि अंगोला में हाथियों के झुंडों के संरक्षण पर कदम उठाये जा रहे हैं एवं अफ्रीका के जैव-विविधता की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा रही है.
    •    इस वर्ष के स्लोगन “गो वाइल्ड फॉर लाइफ” का उद्देश्य लोगों का वन्य जीवों पर हो रहे अत्याचारों एवं उसके नुकसान की ओर ध्यान दिलाना है.
    •    वर्ष 2016 के विषय का उद्देश्य वन्यजीवन के अवैध व्यापार को उजागर करना है. अवैध व्यापार द्वारा हाथियों, गेंडे एवं चीते तथा अन्य प्राणियों का जीवन संकट में आ चुका है. इससे हमारी अर्थव्यवस्था, सामाजिक परिदृश्य एवं सुरक्षा पर भी प्रभाव पड़ता है.
    •    वन्यजीवन के अवैध व्यापर से पृथ्वी पर जैव-विविधता पर गहरा असर पड़ा है, बहुत सी प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं. वन्यजीवों में हाथी, गेंडे, बाघ, गोरिल्ला एवं समुद्री कछुए अवैध व्यापर के मुख्य शिकार हैं.
    •    एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2011 में जावा प्रजाति के गेंडे वियतनाम में विलुप्त हो चुके हैं. ग्रेट एप्स गाम्बिया, बुर्किना फासो, बेनिन एवं टोगो से समाप्त होते जा रहे हैं. हॉर्नबिल एवं पेनगोलिन भी अवैध व्यापर के कारण संकट में हैं.
    •    पर्यावरण के प्रति जागरुकता फ़ैलाने के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने टाइगर एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस ट्रेन द्वारा देश में बाघों के संरक्षण के प्रति जागरुकता फैलाई जाएगी. इस ट्रेन को दिल्ली स्थित सफ़दरजंग रेलवे स्टेशन से रवाना किया गया.
    •    इस दिवस की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्टॉकहोम मानवीय वातावरण पर 1972 में हुए अधिवेशन के दौरान की गयी. पहला पर्यावरण दिवस 1973 में मनाया गया. वर्ष 2015 का विषय था –  सात अरब स्वप्न, एक ग्रह, देखभाल से साथ उपयोग.

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    केंद्र सरकार पर्यावरण संतुलन बनाने के लिए प्रतिबद्ध है

    केंद्र सरकार पर्यावरण संतुलन बनाने के लिए प्रतिबद्ध है ,इसके लिए सरकार दुनियाभर से तकनीकी व वित्तिय सहायता जुटाएगी।  
    •    पंचकुला जिला के पिंजौर क्षेत्र के गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में एशिया का पहला ‘जिप्स वल्चर रि-इंटरोडकशन प्रोग्राम’ लांच किया गया.
    •    हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल नेपौधारोपण भी किया और गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र से दो गिद्धों (हिमालयन ग्रीफोनस प्रजाति) को स्वच्छंद किया। 
    •    इन गिद्धों की पहचान के लिए उनको टैग लगाए गए और पैरों में छल्ला लगाया गया। 
    •    भारत में आज वन क्षेत्र मात्र 20 प्रतिशत बचा है जबकि सरकार ने इसको 33 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा है। 
    •    लोगों को वनों की खेती करने तथा दूसरी फसलों के साथ खेत की मेड़ पर पेड़ लगाने के लिए भी किसानों को प्रेरित किया जाएगा। 
    •    उन्होंने आज यहां से मध्यप्रदेश के लिए वहां के वन्य अधिकारियों को 10 गिद्ध भी सौंपे। 
    •    इस अवसर पर एक गिद्ध का नाम जोध सिंह रखा गया। 
    •    मानव की गलतियों के कारण आज वन्य प्राणियों की कई प्रजातियां लुप्त होने के कगार पर हैं जिसके कारण प्राकृतिक असंतुलन पैदा हो गया है। 
    •    गिद्धों की संख्या देश से करीब 95 प्रतिशत लुप्त हो चुकी है। इनकी संख्या को बढ़ाने के लिए आज जंगल के खुले वातावरण में छोड़ा जा रहा है। 
    •    करीब 15 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में गिद्ध की संख्या बढ़ाने की दिशा में कोशिश की गई थी जिसके सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं। 
    •    देश में गिद्ध के संरक्षण एवं संवर्धन में ‘मुंबई नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी’ भी सहयोग कर रही है। 
    •    राज्य सरकार शिवालिक और अरावली क्षेत्र में भी वन संरक्षण एवं प्रकृति संरक्षण के लिए प्रयासरत है।
    •    मोरनी क्षेत्र में 500 एकड़ में हर्बल पार्क बनाया जाएगा।  

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    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में 1 जून 2016 को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और वन्य जीवों की तस्करी से निपटने के लिए भारत और अमेरिका के मध्य सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी प्रदान की. 
    •    इस मंजूरी से भारत वन्यजीव संरक्षण और वन्यजीव क्षेत्रों के प्रबंधन तथा वन्यजीवों और उनसे बनने वाले उत्पादों के अवैध कारोबार से निपटने से जुड़े अमेरिकी संस्थानों की विशेषज्ञता से लाभान्वित होंगे.

    प्रजातियों के संरक्षण के प्रयासों और वन्यजीव अपराधों के मामलों में बेहतर वैज्ञानिक प्रमाण संग्रहण में उपयोगी है, जिससे बेहतर अमल का मार्ग प्रशस्त होगा.
    •    भारतीय वन्यजीव संस्थान के मौजूदा यूनेस्को श्रेणी-2 केंद्र की संस्थागत क्षमता को सुगम बनाया जा सकेगा.
    इससे जैव विविधता के संरक्षण संबंधी जटिल मामलों को समझकर जनता, विशेषकर युवाओं और बच्चों को संवेदनशील बनाने हेतु वन प्रबंधकों का जनता के साथ तालमेल मजबूत बन सकेगा.
    •    भारत और अमेरिका समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक धरोहर से संपन्न रहे हैं और उन्होंने अपने-अपने यहां संरक्षित क्षेत्रों का एक नेटवर्क स्थापित किया है. 
    •    वन्यजीव सरंक्षण से जुड़ी प्राथमिक समस्याओं को निपटाने हेतु दोनों देशों के पास अपनी व्यवसायिक कुशलता को साझा करने की संभावनाएं मौजूद हैं, ऐसे में यह सहमति ज्ञापन सहयोग का सुविधाजनक मंच उपलब्ध कराएगा.

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    एनबीसीसी,बिहार में गंगा सफाई योजना आरंभ करेगा

    राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम लिमिटेड (एनबीसीसी) ने मई 2016 के अंतिम सप्ताह में घोषणा की कि वह बिहार में गंगा सफाई हेतु एक परियोजना आरंभ करेगा.
    •    दिसम्बर 2015 में, जल संसाधन मंत्रालय (गंगा नदी विकास और संरक्षण विभाग) ने एनबीसीसी को बिहार में नदी की स्वच्छता एवं सफाई कार्यों हेतु चयनित किया.
    •    इस संबंध में मंत्रालय द्वारा तीन शहरों में परियोजना को मंजूरी दी गयी है.
    •    परियोजना की विशेषताएं
    •    एनबीसीसी गाद की सफाई करेगा.
    •    नए घाटों का निर्माण किया जायेगा.
    •    नदी की सतह की सफाई की जाएगी.
    •    यहां शमशान एवं सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया जायेगा.
    •    गांवों की नालियों का सिस्टम भी सुधारा जायेगा ताकि यहां का अपशिष्ट पानी नदी में न गिरे.
    •    राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम लिमिटेड (एनबीसीसी)
    •    यह श्रेणी-1 में नवरत्न संगठन है.
    •    यह केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र ईकाई है. इसका अधिकतम भाग भारत सरकार द्वारा अधिग्रहित है.
    •    यह रियल एस्टेट विकास एवं भवन निर्माण व्यापार में कार्यरत संगठन है.
    •    इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है.

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    सिक्किम ने लगाई सरकारी कार्यक्रमों में बोतलबंद पानी पर रोक

    पर्यावरण को बचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सिक्किम सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में बोतलबंद पानी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। 
    •    साथ ही खाना रखने के फोम के बने डिब्बों (कंटेनर) पर पूरे राज्यभर में रोक लगा दी गई है। 
    •    सिक्किम सरकार ने बाकायदा अधिसूचना जारी कर कहा है कि सरकारी कार्यक्रमों और बैठकों में बोतलबंद पानी का बेहद ज्यादा इस्तेमाल हो रहा था।
    •    जिससे प्लास्टिक के कचरे की समस्या खड़ी हो गई थी और इसे जमीन में गाढ़े जाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा था। 
    •    जिसकी वजह से इस पर रोक लगाने के आदेश दिए गए। 
    •    बोतलबंद पानी की जगह फिल्टर्ड पानी के इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
    •    सरकार ने दूसरी अधिसूचना में कहा गया है कि राज्य के बाजारों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक में भी फोम से बने डिब्बों (कंटेनर) का जमकर इस्तेमाल हो रहा है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। •    वहीं नगर निकाय इकाइयों में कचरे का ढेर खड़ा हो गया है और जिसके निपटारे में जमीन के बड़े हिस्से का इस्तेमाल हो रहा है।
    •    मुख्यमंत्री पवन चामलिंग की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ये निर्णय लिए गए।

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