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भारत के पहले वाणिज्यिक न्यायालय एवं विवाद निपटान केंद्र का छत्तीसगढ़ में शुभारम्भ

भारत के पहले वाणिज्यिक न्यायालय एवं विवाद निपटान केंद्र का 2 जुलाई 2016 को छत्तीसगढ़ में उद्घाटन किया गया.
•    इस केंद्र एवं न्यायालय परिसर का उद्घाटन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह एवं सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मदन बी लोकुर द्वारा किया गया.
•    इस न्यायालय में मध्यस्थता केंद्र भी स्थापित किया गया है.
•    यहां दी गयी कुछ अन्य सुविधाओं में विडियो-कांफ्रेंसिंग, ई-कोर्ट, ई-लाइब्रेरी, ई-फाइलिंग एवं ई-समन भी शामिल हैं.
•    यह अत्याधुनिक सुविधाएं निवेशकों को वाणिज्यिक गतिविधियों में सहायता करेंगी.
•    न्यायालय द्वारा न्यायिक प्रक्रिया में भी सुधार किया जा सकेगा.
•    छत्तीसगढ़ भारत का एक राज्य है। 
•    भारत में दो क्षेत्र ऐसे हैं जिनका नाम विशेष कारणों से बदल गया - एक तो 'मगध' जो बौद्ध विहारों की अधिकता के कारण "बिहार" बन गया और दूसरा 'दक्षिण कौशल' जो छत्तीस गढ़ों को अपने में समाहित रखने के कारण "छत्तीसगढ़" बन गया। 
•    किन्तु ये दोनों ही क्षेत्र अत्यन्त प्राचीन काल से ही भारत को गौरवान्वित करते रहे हैं। 
•    "छत्तीसगढ़" तो वैदिक और पौराणिक काल से ही विभिन्न संस्कृतियों के विकास का केन्द्र रहा है। 
•    यहाँ के प्राचीन मन्दिर तथा उनके भग्नावशेष इंगित करते हैं कि यहाँ पर वैष्णव, शैव, शाक्त, बौद्ध के साथ ही अनेक आर्य तथा अनार्य संस्कृतियों का विभिन्न कालों में प्रभाव रहा है।

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कैबिनेट ने मॉडल दुकान एवं प्रतिष्ठान (रोजगार एवं सेवा शर्तों का नियमन) विधेयक 2016 पर विचार

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मॉडल दुकान एवं प्रतिष्ठान (रोजगार एवं सेवा शर्तों का नियमन) विधेयक 2016 पर विचार किया। इसके बाद यह विधेयक राज्यों/ केन्द्र शासित क्षेत्रों को भेजा जाएगा और उसके बाद इसपर इनसे विचार मांगे जाएंगे तथा उनकी आवश्यकताओं के अनुसार इसके प्रावधानों को संशोधित करने के बाद ही इसे लागू करने पर विचार किया जाएगा। 

•    इस विधेयक को लोगों से इंटरनेट के माध्यम से विस्तृत विचार-विमर्श और कर्मचारियों/श्रम प्रतिनिधियों, नियोक्ता संघों/महासंघों और राज्य सरकारों के साथ त्रिपक्षीय परामर्श प्रक्रिया के बाद ही अंतिम रूप दिया गया। 
•    इसके अंतर्गत विनिर्माण इकाइयों को छोड़कर वैसे प्रतिष्ठानों जहां दस या उससे अधिक श्रमिक काम करते हैं, आएंगे।
•    यह विधेयक बिना समय बाधता के साल में 365 दिन संचालित करने स्वतंत्रता प्रदान करता है। अगर संस्था महिलाओं को आश्रय का प्रावधान, आराम कक्ष, महिला शौचालय, गरिमा को पर्याप्त सुरक्षा और परिवहन साधन इत्यादि उपलभ्ध कराती है तो उन्हें (महिलाओं को) रात की पाली में भी काम करने की इजजात दी जाए। 
•    भर्ती, प्रशिक्षण, स्थानांतरण और पदोन्नति के मामले में महिलाओं के खिलाफ कोई भेदभाव न हो । 
•    पंजीकरण के लिए एक ऑनलाइन सरलीकृत प्रक्रिया । 
•    श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए नियोक्ता द्वारा उठाए जाने पर्याप्त उपाय के संबंध में नियम बनाने के लिए सरकार की शक्तियां। 
•    साफ और स्वच्छ पीने का पानी 
•    प्रतिष्ठानों में शौचालय, क्रेच, प्राथमिक चिकित्सा और कैंटीन की सुविधा और अगर यह जगह की कमी या अन्यथा किसी और व्यक्तिगत कारण से संभव है या नहीं। 
•    राष्ट्रीय छुट्टियों इत्यादि के अलावा 5 भुगतान युक्त त्योहार पर छुट्टियां 
•    रोज 9 घंटे या सप्ताह में कुल 48 घंटे के साथ 125 घंटे के कुल समय से ज्यादा उच्च कुशल श्रमिकों की छूट (जैसे आईटी, जैव प्रौद्योगिकी और अनुसंधान तथा विकास के क्षेत्र में काम करने वाले) दी जाएगी 
•    मॉडल विधेयक का उद्देश्य विधायी प्रावधानों में एकरूपता लाना होगा। इसे इतना आसान बनाना कि सभी राज्य इसे अपनाने के लिए तैयार हों और इस तरह देश भर में एक समान काम करने की स्थिति और कारोबार करने की आसानी को सुनिश्चित किया जाए तथा रोजगार के अवसर पैदा हों।

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महाराष्ट्र में यहूदियों को मिला अल्पसंख्यक दर्जा

महाराष्ट्र राज्य मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र में रहने वाले यहूदियों को अल्पसंख्यक दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। 
•    यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में किया गया। इस फैसले से इन समुदायों के छात्रों को राज्य सरकार से छात्रवृत्ति हासिल करने और अपना शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने में मदद मिलेगी। 
•    आधिकारिक तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय का दर्जा मिलने के बाद यहूदियों को अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की तरह कई विशेषाधिकार मिलेंगे। 
•    यहूदियों के लिए अपनी शादी का पंजीकरण कराना आसान हो जाएगा। 
•    वे अपना शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और अपनी परंपरा और संस्कृति को बढ़ावा देने में भी सक्षम होंगे। 
•    यहूदी 2300 साल से अधिक अवधि से भारत के समाज का हिस्सा हैं।
•    सरकार को नहीं पता यहूदियों की जनसंख्या
•    देश में और महाराष्ट्र में कितने यहूदी रहते हैं इस बारे में महाराष्ट्र अल्पसंख्यक विभाग की प्रधान सचिव जयश्री मुखर्जी ने कहा कि राज्य सरकार के पास समुदाय के कितनी संख्या में लोग महाराष्ट्र में रहते हैं इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है। 
•    2001 की जनगणना के अनुसार भारत में रहने वाले यहूदियों की संख्या 4650 थी जिसमें से आधे से ज्यादा 2466 महाराष्ट्र में रहते थे।

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विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963 की समीक्षा समिति ने रिपोर्ट पेश की

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने विशिष्ट राहत अधिनियम 1963 की समीक्षा करने के लिए 28 जनवरी 2016 को एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था. 
•    विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963 में विशिष्ट राहत से संबंधित कानूनों का प्रावधान किया गया है.
•    इस समिति ने 20 जून को अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है 
•    आनंद देसाई के नेत्रित्व में इस समिति ने केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा को अपनी रिपोर्ट सौंपी ।
•    इस रिपोर्ट में बताई गयी व्यस्था से देशी में कारोबार करना आसान हो जाएगा 
•    पारस्परिकता, और निहित शर्तों को संबोधित किया गया।
•    तीसरे पक्ष के अधिकारों के लिए प्रावधानों (सरकारी ठेके के लिए अन्य की तुलना में) को लागू करने के नितं भी बनाए गये हैं .
अधिनियम किसी भी प्रकार का अधिकार प्रदान नहीं करता। 
•    विशिष्ट राहत केवल एक कानूनी अधिकार के उल्लंघन के लिए प्रदान की जाती है।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दोषपूर्ण ऋणों की वसूली के लिए विधेयक को मंजूरी दी

15 जून 2016 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रतिभूति हित एवं ऋण कानून की वसूली एवं प्रकीर्ण उपबंध (संशोधन) विधेयक, 2016 को मंजूरी दे दी.इसे 11 मई 2016 को लोकसभा में पेश किया गया था. 
•    विधेयक के जरिये व्यापार करने में आसानी में सुधार और दोषपूर्ण ऋणों की फास्ट ट्रैकिंग वसूली द्वारा अर्थव्यवस्था में निवेश को आकर्षित करने का प्रयास किया जायेगा. 
•    यह प्रक्रिया जिलाधिकारी की सहायता से की जाती है और इसमें अदालतों या ट्रिब्यूनलों के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती. 
•    जिलाधिकारी द्वारा इस प्रक्रिया को 30 दिनों के भीतर पूरा किए जाने की बात विधेयक में कही गई है. 
•    इसके अलावा, यह अधिनियम ऋण चुकाने में अक्षम रहने पर कंपनी के प्रबंधन पर अधिकार स्थापित करने  में बैंक की सहायता करने के लिए जिलाअधिकारी को शक्ति प्रदान करता है. 
•    ऐसा उस स्थिति में किया जाएगा जब बैंक अपने बकाया ऋण को इक्विटी शेयर में बदल देंगे और कंपनी में 51 फीसदी या उससे अधिक के हिस्सेदार बन जाएंगे. 
•    यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को उनके व्यापार से संबंधित कथनों और संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों के बारे में किसी भी जानकारी की जांच करने की शक्ति प्रदान करता है. 
•    अधिनियम आरबीआई को इन कंपनियों के ऑडिट और निरीक्षण करने का भी अधिकार प्रदान करता है. आरबीआई खुद के द्वारा जारी किए गए निर्देशों का अनुपालन करने में विफल रहने वाली कंपनी को दंडित कर सकता है.
•    अधिनियम में ऋण वसूली न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी की सेवानिवृत्ति की उम्र 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी गई है. 
•    इसने अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष की सेवानिवृत्ति की उम्र 65 वर्ष से बढ़ा कर 67 वर्ष कर दी है. इसमें पीठासीन अधिकारियों और अध्यक्ष को फिर से उनके पद पर नियुक्त किए जाने का भी प्रावधान किया गया है. 
•    अधिनियम में बैंकों और वित्तीय संस्थानों को प्रतिवादी के घर या व्यापार क्षेत्र में अधिकार वाले अदालतों में मामला दायर करना आवश्यक किया गया है. 
•    अधिनियम में बैंक की जिस शाखा में ऋण का भुगतान लंबित है, उस क्षेत्र के न्यायधिकरणों में मामले को दायर करने की अनुमति दी गई है. 
•    अधिनियम में कहा गया है कि अधिनियम के तहत कुछ प्रक्रियाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप में ही की जाएंगी. इसमें पक्षों द्वारा किए गए दावों की प्रस्तुति और न्यायाधिकरणों द्वारा अधिनियम के तहत जारी किए गए समन शामिल हैं.

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जस्टिस राकेश रंजन प्रसाद मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त

मणिपुर उच्च न्यायालय के वरिष्ठ जज जस्टिस राकेश रंजन प्रसाद ने 13 जून 2016 को मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पदभार ग्रहण किया.
•    उन्होंने जस्टिस लक्ष्मी कांता महापात्रा का स्थान लिया, वे 9 जून 2016 को सेवानिवृत हुई थीं.
•    इससे पहले 9 फरवरी 2016 को जस्टिस प्रसाद का झारखंड उच्च न्यायालय से मणिपुर उच्च न्यायालय में ट्रांसफर हुआ था. राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 222 की धारा (1) के तहत उनका ट्रांसफर किया गया.
•    इस धारा के अनुसार, राष्ट्रपति एक न्यायाधीश को एक उच्च न्यायालय से दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित कर सकता है. 
•    उनका जन्म 1 जुलाई 1955 में हुआ, उनका अपनी प्रारंभिक शिक्षा एवं स्नातक डिग्री बिहार से हासिल की.
•    उन्होंने विज्ञान विषय में स्नातक किया तथा पटना लॉ कॉलेज से एलएलबी डिग्री हासिल की.
•    बिहार राज्य बार काउंसिल में उन्हें 17 सितम्बर 1980 को वकील के रूप में शामिल किया गया. उन्होंने सिविल, क्रिमिनल एवं याचिका क्षेत्रों में प्रैक्टिस की.
•    उन्हें 6 मई 1991 को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पद दिया गया तथा इसके बाद उन्हें 8 जून 2001 को जिला न्यायाधीश बनाया गया.
•    उन्होंने 8 जून 2001 को झारखंड उच्च न्यायालय में बतौर रजिस्ट्रार जनरल पदभार ग्रहण किया.

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सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने पत्र-पत्रिकाओं हेतु विज्ञापन नीति जारी की

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 10 जून 2016 को पत्र-पत्रिकाओं हेतु विज्ञापन देने में ज्‍यादा पारदर्शिता और जवाबदेही के उद्देश्‍य से विज्ञापन एवं दृश्‍य प्रचार निदेशालय डीएवीपी ने  नई प्रिन्‍ट मीडिया विज्ञापन नीति तैयार की है.
•    इस नीति में सरकारी विज्ञापन जारी करने की सुचारू व्‍यवस्‍था करने और विभिन्‍न श्रेणियों की पत्र-पत्रिकाओं के प्रति समान और निष्‍पक्ष प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया गया है.
•    मंत्रालय के अनुसार इस नीति में पहली बार समाचार पत्रों के लिए नई आकलन प्रणाली शुरू की गई है. जिसमें बेहतर पेशेवर साख वाले अखबारों को प्रोत्‍साहन दिया जायेगा.
•    ए बी सी तथा आर एन आई से उनकी बिक्री की पुष्टि कराई जायेगी.
•    इससे डीएवीपी के विज्ञापन देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही आयेगी.
•    नीति प्रारूप में अनिवार्य कर दिया गया है कि डीएवीपी विज्ञापनों हेतु भुगतान ईसीएस या एनईएफटी के जरिये ही अखबार या कम्‍पनी के खाते में करेगा.
•    नीति के अन्‍तर्गत पत्र-पत्रिकाओं को तीन श्रेणियों में बांटा गया है.
•    पहली श्रेणी में 25 हजार प्रतियों तक की बिक्री वाले छोटे, 25 हजार एक से 75 हजार प्रतियों की बिक्री वाले मझौले और 75 हजार या उससे ज्‍यादा बिक्री वाले बड़े पत्र-पत्रिका माने जायेंगे..
•    डीएवीपी विभिन्‍न मंत्रालयों और विभागों की ओर से विज्ञापन जारी करने वाली केन्‍द्रीय संस्‍था है.

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असम विधानसभा ने राज्य में कारोबार में आसानी संबंधी विधेयक 2016 पारित

असम विधानसभा ने राज्‍य में कारोबार करना आसान बनाने संबंधी विधेयक पारित कर दिया है। 
•    इस विधेयक में आवेदनों की प्रक्रिया में तेजी लाना और उद्योग स्थापित करने के लिए मंजूरी से जुड़े प्रावधान है। 
•    विधेयक का मुख्य उद्देश्य राज्य के आर्थिक विकास के लिए निवेश अनुकूल माहौल बनाना है। 
•    इस बिल का मूल उद्देश्य असम में आर्थिक विकास के लिए निवेश के अनुकूल माहौल बनाना है। 
•    प्रदेश में भाजपा के सत्ता में आने के साथ उद्योग जगत ने उम्मीद जताई थी नई सरकार के लिए एक सकारात्मक बदलाव लाने और कारोबार करना आसान होगा। 
•    विधानसभा में पारित बिल के अनुसार निवेश के मुद्दों से जुड़े हर पहलू पर विचार के लिए असम ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन नामक एक ब्यूरो की स्थापना का प्रस्ताव है।
•    पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और तमिलनाडु में सत्तारूढ़ एआईएडीएमके की महासचिव जे. जयललिता जीती थी वहीँ असम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बहुमत हासिल किया था और केरल में पिछली बार सत्ता से चूके वाम मोर्चे ने कब्जा जमाया।

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बलात्कार पीड़ितों हेतु राष्ट्रीय मुआवजा नीति बनाई जाए: सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने 26 मई 2016 को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह बलात्कार पीड़ितों को पर्याप्त राहत मुहैया कराने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाए. न्यायालय ने यह भी कहा कि ‘निर्भया कोष’ जैसा एक अलग कोष बनाना पर्याप्त नहीं है और यह ‘जुबानी जमा खर्च’ जैसा है.
•    न्यायमूर्ति पीसी पंत और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अवकाश कालीन पीठ ने यह दिशा निर्देश 2012 और 2013 के बीच अदालत में दाखिल की गयी छह याचिकाओं की सुनवाई के दौरान जारी किए.
•    अदालत ने महिलाओं के साथ होने वाली घटना और उनकी सुरक्षा के विषय पर विभिन्न चिंता के दृष्टिगत यह निर्देश जारी किए.
•    अब तक 29 राज्यों में से सिर्फ 25 राज्यों ने इस योजना को अधिसूचित किया है
•    अदालत के अनुसार इस विषय पर ‘अलग-अलग राज्यों की अलग-अलग योजनाएं हैं.
इस विषय पर कोई राष्ट्रीय योजना नहीं है कि बलात्कार पीड़ितों को मुआवजा कैसे दिया जाए.
भारत सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को पर्याप्त राहत मुहैया कराई जाए. 
•    पीठ ने केंद्र व सभी राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस भी जारी किया.
सीआरपीसी की धारा 357-ए को प्रभावी तौर पर लागू कराने और पीड़िता मुआवजा योजनाओं की स्थिति को लेकर उनसे जवाब तलब किया है.
•    न्यायालय ने ऐसे बलात्कार पीड़ितों की संख्या बताने को भी कहा है जिन्हें मुआवजा दिया गया.

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केंद्र सरकार ने मानव तस्करी से निपटने हेतु नया विधेयक-2016 जारी किया

केंद्र सरकार ने 30 मई 2016 को मानव तस्‍करी, रोकथाम, संरक्षण और पुनर्वास मसौदा विधेयक-2016 जारी कर दिया. महिला और बाल विकास मंत्रालय के अनुसार विधेयक में पीडि़तों का विशेष रूप से ध्‍यान रखा गया है. नई दिल्‍ली में विधेयक का मसौदा जारी किया गया. साल के अंत में मानव तस्करी (रोकथाम, संरक्षण और पुनर्वास) विधेयक-2016 को संसद में रखा जाना है.
•    नए विधेयक का उद्देश्‍य संबंधित कानूनों को समाहित करके मानव तस्‍करी की रोकथाम करना और तस्‍करों को कठोर सजा दिलाना.
•    पीडि़तों को संरक्षण और पुनर्वास सुनिश्चित कराना है.
•    मानव तस्‍करी के खिलाफ व्‍यापक कानून बनाए जाने के अति‍रिक्‍त, विधेयक में विशेष न्‍यायालय और जांच एजेंसी की स्‍थापना का भी प्रावधान है.
•    नए विधेयक में मानव तस्‍करी से संबंधित वर्तमान कानून की कमियों को भी दूर करने का प्रयास किया गया है.
•    विधेयक में तस्‍करी पीडि़तों के पुनर्वास के लिए कोष बनाने का भी सुझाव दिया गया है.
•    कई बार तस्करों और पीड़ितों दोनों को जल भेज दिया जाता है.
•    मानव तस्करी से निपटने के लिए मौजूदा कानून पर्याप्त नहीं हैं.
•    सालाना लाखों लोगों की तस्करी हो रही है जिनमें से अधिकतर बच्चे हैं.
•    नया कानून खासतौर पर मानव तस्करी से निपटने हेतु तैयार किया गया है.
•    नए विधेयक में मानव तस्करी के अपराधियों की सजा को दोगुना करने का प्रावधान है.
•    अपराधियों को एक ही अपराध दोहराने पर कड़ी सज़ा दिलाना
•    ऐसे मामलों की तेज सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन का भी प्रावधान है.
•    ऐसे मामलों को पड़ोसी देशों के साथ संयुक्त कार्य समूहों द्वारा निपटाना और इसके लिए निवारक उपाय शुरू करना शामिल है.
•    मसौदा विधेयक कानून के दायरे में बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार की सरकारों के साथ काम करने, तस्करी पर अंकुश लगाने और इन खामियों को उजागर करना है.
•    कानून के मुताबिक पीड़ितों की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया जा सकेगा.

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