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भारत व मोजांबिक ने तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए

भारत ने 08 जुलाई, 2016 को मोजांबिक के साथ नशीले पदार्थों की तस्करी, दालों के उत्पादन तथा व्यापार और खेल क्षेत्र में तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए. समझौतों पर हस्ताक्षर आर्थिक मामलों के सचिव अमर सिन्हा ने किए.इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मोजांबिक के राष्ट्र्पति फिलिप न्यूंसी के बीच बातचीत में मसौदा तय किया गया.
•    समझौते खेल, मादक पदार्थों के अवैध व्यापार पर नियंत्रण और दालों के उत्पादन तथा व्यापार के सम्बन्ध में किए गए.
•    दोनों देश कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, कौशल विकास, संसाधन विकास, सूचना प्रौद्योगिकी और सुरक्षा के क्षेत्र में भागीदारी करेंगे.
•    भारत सरकार ने मोजाम्बिक सरकार को आश्वासन दिया है कि भारत जन स्वास्थ्य व्यवस्था, विशेषकर एड्स के लिए मदद जारी रखेगा.
•    समझौतों में मादक पदार्थों के अवैध व्यापार पर काबू पाना, आतंकवादी ढांचे को मिल रहे समर्थन को कमजोर करने की दिशा में एक प्रभावशाली उपाय है
•    दोनों देशों के नेता सांसदों के बीच अधिक संपर्क पर भी सहमत हुए.
•    अफ्रीका में भारत से होने वाले निवेश का एक चौथाई मोजाम्बिक में ही होता है. इसी कारण मोजाम्बिक भारतीय निवेश का प्रवेश द्वार कहा जाता है.

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भारत ने नाइजीरिया में एक परिधान प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया

भारत ने जुलाई 2016 के पहले सप्ताह में नाइजीरिया में एक परिधान प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया ताकि इस पश्चिमी अफ्रीकी देश में कपड़ा उद्योग को मदद की जा सके.
•    नाइजीरिया की सरकार के साथ भागीदारी में स्थापित अपनी तरह का पहला केंद्र है. यह केंद्र अफ्रीका के लिए 'कपास तकनीकी सहायता' कार्यक्रम के तहत स्थापित किया गया है जिसका उद्घाटन 22 जून 2016 को हुआ. 
•    इस कार्यक्रम का कार्यान्वयन भारतीय वाणिज्य विभाग कर रहा है.
•    इस परिधान केंद्र का लक्ष्य कपास और कपड़ा मूल्यवर्धन श्रृंखला को मजबूत करने के लक्ष्य को हासिल करना है और घरेलू तथा पश्चिम अफ्रीकी क्षेत्र में निर्यात केंद्रित परिधान उद्योग के लिए कुशल कार्यबल की जरूरत पूरी करना.
•    नाइजीरिया भारत का महत्त्वपूर्ण व्यापा‍र भागीदार है. 
•    वित्त वर्ष 2015-16 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 12.17 अरब डॉलर रहा जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष में 16.36 अरब डॉलर था. 
•    नाइजीरिया अफ्रीका का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है और वहां से भारत में सबसे अधिक मात्रा में कच्चा तेल आता है. 
•    भारत की 100 से अधिक कंपनियां नाइजीरिया में दूरसंचार, हाइड्राकार्बन्स, टेक्सटाईल, रसायन, बिजली उपकरण फार्मा, प्लास्टिक, सूचना प्रौद्योगिकी और वाहन क्षेत्रों में परिचालन करती हैं.

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रक्षा-विनिर्माण क्षेत्र में भारत और दक्षिण अफ्रीका संबंधों को और गहरा बनाएंगे

भारत और दक्षिण अफ्रीका ने अपने पारंपरिक संबंधों को रेखांकित करते हुए रक्षा उत्पादन, विनिर्माण, खनन और खनिज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को गहरा बनाने पर सहमति व्यक्त की है, साथ ही आतंकवाद से ‘सक्रियता’ से निपटने में सहयोग करने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे में सहयोग करने का संकल्प व्यक्त किया। 
•    दक्षिण अफ्रीका वैश्विक स्तर पर प्रमुख रक्षा उत्पादक देश है। बैठक के दौरान मोदी ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन करने के लिए राष्ट्रपति जैकब जुमा को धन्यवाद दिया। 
•    48 सदस्यों वाले परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में शामिल होने के भारत के प्रयास पर आपत्ति करने वाले कुछ देशों में दक्षिण अफ्रीका भी शामिल था। 
•    कारोबार और निवेश विशेष तौर पर खनिज और खनन, रसायन और फार्मास्यूटिकल्स , विनिर्माण और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को और आगे बढ़ाने की क्षमता है। 
•    पिछले दस वर्षो में दोतरफा कारोबार 300 प्रतिशत बढ़ा है। 
•    भारतीय कंपनियों के दक्षिण अफ्रीका में मजबूत कारोबारी हित हैं । 
•    इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन हिंद महासागर से जुड़े नौवहन पड़ोसियों के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफार्म है और 2017-19 तक इसकी अध्यक्षता के लिए दक्षिण अफ्रीका का स्वागत करता हूं।
•    राष्ट्रपति जुमा ने मोदी का में स्वागत किया और कहा कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग करने पर चर्चा की जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा शामिल है। 

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उज्बेकिस्तान ने सुरक्षा के मामले में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति इस्लाम करीमोव के साथ गुरुवार को बैठक की जिसमें दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार और मजबूती देने के लिए सुरक्षा के मामले में सहयोग और बढ़ाए जाने की बात की।
•    बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को याद किया और संबंधों में और विस्तार करने एवं उन्हें और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। 
•    प्रधानमंत्री एक वर्ष में दूसरी बार उज्बेकिस्तान आए हैं। उन्होंने उज्बेकिस्तान के नागरिकों के लिए ई-पर्यटन वीजा विस्तार के भारत के निर्णय के बारे में बताया।
•    उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान की स्वतंत्रता के 25 वर्ष पूरे होने और भारत के साथ उसके राजनयिक संबंधों की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारत यहां 'भारत का उत्सव' और 'भारतीय व्यापार प्रदर्शनी' आयोजित करेगा।
•    दोनों नेताओं ने उल्लेख किया कि रक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ रहा है और साइबर सुरक्षा पर एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर हुए हैं। 
•    उन्होंने सुरक्षा के क्षेत्र में और सहयोग का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने एससीओ में भारत की सदस्यता को समर्थन देने के लिए राष्ट्रपति करीमोव को धन्यवाद दिया।

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कैबिनेट ने भारत और जर्मनी के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल को आज स्‍टेनबिएस जीएमबीएच सीओ. केजी फर टेक्‍नोलॉजिस्‍ट्रांसफर, जर्मनी के साथ पूंजीगत वस्‍तुओं के उपक्षेत्रों सहित विनिर्माण में तकनीकी संबंधी साधन जुटाने से संबंधित सहमति पत्र पर हस्‍ताक्षर किए जाने की जानकारी दी। इस सहमति पत्र पर 25 अप्रैल,2016 को जर्मनी के हनोवर में इंडस्‍ट्रीयल एक्‍जीबिशन हनोवर मैसे -2016 के दौरान हस्‍ताक्षर किए गए। 
•    स्‍टेनबिएस जीएमबीएच व्‍यावहारिक औद्योगिक अनुसंधान के क्षेत्र में यूरोप का एक प्रमुख संगठन है। यह विनिर्माण में चिन्हित परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन के लिए प्रौद्योगिकी संसाधन सहभागी के रूप में कार्य करेगा। सहमति पत्र में परिकल्पित सहयोग के क्षेत्र हैं: 
•    विशिष्‍ट प्रौद्योगिकियों की रूपरेखा तैयार करना, 
•    विशिष्‍ट पूंजीगत वस्‍तुओं के उपक्षेत्रों के लिए टेक्‍नोलॉजी रोड मैपिंग 
•    पूंजीगत वस्‍तुओं के समूह की प्रौद्योगिकीय स्थिति का आकलन 
•    प्रौद्योगिकी से संबंधित कार्यक्रमों में सहयोग 
•    मौजूदा संस्‍थानों को उन्‍नत बनाना/भारत में ग्रीन फिल्‍ड संस्‍थानों की स्‍थापना और तकनीकी से संबंधित अन्‍य सहयोग एवं सहकार्य 
•    यह सहमति पत्र भारतीय पूंजीगत वस्‍तु क्षेत्र द्वारा औद्योगिकी प्रौद्योगिकी परियोजनाओं को सहायता प्रदान करने संबंधी माध्‍यम का प्रारूप है। यह सहमति पत्र सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्‍न उपक्रमों और पूंजीगत वस्‍तु क्षेत्रों की इकाइयों को तकनीकी खामियों का पता लगाने और उन्‍हें दूर करने में स्‍टेनबिएस जीएमबीएच की क्षमताओं और विशेषज्ञता तक पहुंच बनाने के लिए मंच प्रदान करेगा।

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केंद्र सरकार ने बेल्जियम के साथ कर संधि के संशोधन को मंजूरी दी

केंद्र सरकार ने 22 जून 2016 को दोहरे कराधान से बचने और आयकर के संबंध में होने वाली अपवंचना की रोकने के लिए बेल्जियम के साथ एक संशोधित संधि पर हस्ताक्षर करने की अनुमति दे दी.
•    इस संशोधन से दोनों देशों के बीच कर से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान के मौजूदा प्रारूप की संभावनाएं व्‍यापक होंगी, जिनसे कर वंचना और कर परिहार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
•    इसके तहत पूंजीगत सामान क्षेत्र की कुछ श्रेणियों और विनिर्माण क्षेत्र के लिए तकनीक प्राप्त करने का समझौता किया गया है.
•    इस संबंध में जर्मनी की स्टीनबीस जीएमबीएस कंपनी के साथ 25 अप्रैल 2016 को जर्मनी में एक सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे.
•    इस समझौते के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की विभिन्न कंपनियां और पूंजीगत सामान क्षेत्र की कई इकाइयों को स्टीनबीस की क्षमताओं और विशेषज्ञता का लाभ उठाने का मौका मिलेगा.
•    इस प्रोटोकॉल से करों के संग्रह में परस्पर सहायता से संबंधित मौजूदा संधि के प्रावधानों में भी संशोधन करेगा.

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भारत और थाईलैण्ड ने संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए

भारत और थाईलैंड ने 17 जून 2016 को शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में दो समझौते किए हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत की यात्रा पर आए थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रायुत चान ओ चा और दोनों देशों के बीच शिष्टमंडल स्तर की वार्ता के बाद ये समझौते किए गए.
•    भारत और थाईलैंड रक्षा और नौवहन के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाएंगे.
•    थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रायुत चान ओ चा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दोनों देशों के आतंकवाद के खतरों से निपटने के लिए सुरक्षा सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है.
•    थाईलैंड के पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए भारत जल्दी ही दोहरा ई-पर्यटक वीजा जारी करेगा.
•    भारत और थाईलैंड ने भारत-म्यांकमा-थाईलैंड के बीच त्रिपक्षीय राजमार्ग के निर्माण को पूरा करने को सर्वोच्चल प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है.
•    तीनों देशों के बीच मोटर वाहन समझौते पर शीघ्र हस्तालक्षर को भी प्राथमिकता दी जाएगी.
•    मोदी और चान ओ चा ने अगले वर्ष थाईलैंड में भारत पर्व और भारत में थाईलैंड पर्व मनाये जाने की भी घोषणा की.

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महाराष्ट्र का नागपुर और चीन का जिनान अब होंगे ‘सिस्टर सिटीज’

महाराष्ट्र का नागपुर और चीन का जिनान शहर एक संधि पर हस्ताक्षर के बाद ‘सिस्टर सिटीज’ बन गए हैं। 
•    इस संधि के तहत शिक्षा, खेल, युवा मामलों, शहरी नियोजन एवं अन्य क्षेत्रों में विचारों एवं प्रौद्योगिकी के आदान प्रदान की अनुमति होगी।
•    दोनों शहरों के बीच यह रिश्ता बनाने के लिए कल नागपुर नगर निगम (एनएमसी) और जिनान ने इस संबंध में समझौता किया।
•    नागपुर के महापौर प्रवीण डाटके और चीनी प्रतिनिधिमंडल के अधिकारियों की मौजूदगी में यहां नागपुर के नगर आयुक्त श्रवण हार्डिकर और जिनान म्यूनिसिपल पीपुल्स कांग्रेस के निदेशक शू चांगयू ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
•    नागपुर महाराष्ट्र राज्य का एक प्रमुख शहर है। 
•    नागपुर की लगभग आधी आबादी मराठी भाषा बोलती है। 
•    यह नगर संतरों के लिये काफी मशहूर है। 
•    इसलिए इसे लोग संतरों की नगरी भी कहते हैं।
•    हाल ही में इस शहर को देश के सबसे स्वच्छ व सुदंर शहर का इनाम मिला है। 
•    नागपुर भारत देश का दूसरे नंबर का ग्रीनेस्ट (हरित शहर) शहर माना जाता है। 
•    बढ़ते इन्फ्रास्ट्रकचर की वजह से नागपुर की गिनती जल्द ही महानगरों में की जायेगी।

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भारत और बंगलादेश के बीच संशोधित अंतर्देशीय जल परिवहन और व्यापार पारगमन सुविधा आरम्भ

भारत और बंगलादेश के आशूगंज बंदरगाह के बीच 16 जून 2016 को संशोधित अंतर्देशीय जल परिवहन और व्यापार समझौते के तहत पारगमन सुविधा शुरू हो गई.
•    इस समझौते पर पिछले साल जून में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ढाका यात्रा के दौरान हस्ताशक्षर किये गये.
•    कोलकाता से एक हजार टन इस्पात और लोहे की चादरें लेकर एक जहाज 15 जून की रात बंगलादेश में आशुगंज की नदी बंदरगाह पहुंचा. इस इस्पात को बांग्लादेश के रास्ते त्रिपुरा में भेजा जाएगा.
•    इसका उद्घाटन बांग्लादेश के जहाजरानी मंत्री शाहजहां खान ने आशुगंज में भारतीय उच्चायुक्त हर्षवर्धन श्रृंगला की उपस्थिति में किया.
•    इसका उद्देश्य व्यापार को प्रोत्साहन देना और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए वस्तुओं की आसान आवाजाही सुनिश्चित करना है.
•    थल-जल पारगमन एवं व्यापार पर संशोधित संधि के तहत यह सुविधा शुरू की गई है.
•    दूसरी ओर हाइड्रोकार्बन सेक्टर में भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए बांग्लादेश के एक प्रतिनिधिमंडल ने पानीपत रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का दौरा किया.

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल को बाह्य अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोग के लिए अंतरिक्ष विभाग/भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (डीओएस/इसरो) और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (सीएसए) के बीच हस्‍ताक्षरित सहमति पत्र (एमओयू) के बारे में अवगत करा दिया गया है। 
•    इस एमओयू पर 15 अप्रैल, 2015 को ओटावा, कनाडा में हस्‍ताक्षर किए गए थे। 
•    इस एमओयू से एक संयुक्‍त टीम का गठन होगा, जिसमें इसरो और सीएसए के सदस्‍य शामिल होंगे। यह टीम सहयोगात्‍मक परियोजनाओं पर गौर करने एवं इन्‍हें परिभाषित करने सहित कार्ययोजना नये सिरे से तैयार करेगी और इसके साथ ही समय सीमा तय करेगी। 
•    इससे अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के शांतिपूर्ण उपयोग के क्षेत्र में विविध अनुसंधान के अवसर भी मिलेंगे। 
•    सफल अंतरिक्ष सहयोग को एस्ट्रोसैट खगोल विज्ञान मिशन के समर्थन में उपग्रह ट्रैकिंग नेटवर्क परिचालन और अल्ट्रा वायलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (यूवीआईटी) डिटेक्टर सबसिस्टम के क्षेत्र में लागू दो व्‍यवस्‍थाओं के जरिये क्रमशः दिसम्‍बर 2003 एवं जून 2004 से चलाया जा रहा है। 
•    इसका उद्देश्‍य शांतिपूर्ण उपयोग के लिए बाह्य अंतरिक्ष में भावी सहयोग के साथ-साथ इसका उपयोग सुनिश्चित करना है, ताकि सरकारी, औद्योगिक एवं शैक्षणिक स्‍तरों पर दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक व प्रौद्योगिकी विकास और आपसी संबंधों को सुदृढ़ किया जा सके। 

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