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भारत-अमेरिका ने आर्थिक एवं सतत विकास हेतु आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किये

भारत एवं संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) ने विभिन्न आठ क्षेत्रों में 8 जून 2016 को हस्ताक्षर किये. इन विषयों में उर्जा सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग, आतंकवाद में सूचना विनिमय, स्वच्छ उर्जा एवं जलवायु परिवर्तन शामिल हैं.
•    अंतर्राष्ट्रीय यात्री सुविधा विकास के लिए समझौता ज्ञापन (ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम): ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम, अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा कार्यक्रम है. दोनों देशों द्वारा इस पर शोध के उपरांत कम जोखिम वाले यात्रियों का अमेरिका में आना-जाना आसान हो जायेगा. इस पर कौंसुलर, पासपोर्ट और विदेश मंत्रालय के वीजा प्रभाग और अमेरिका के सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के होमलैंड सुरक्षा विभाग ने हस्ताक्षर किए.
•    अवर्गीकृत समुद्री जानकारी साझा करने हेतु तकनीकी व्यवस्था स्थापित करना: इस व्यवस्था में भारत और अमेरिका के बीच सफेद शिपिंग पर अवर्गीकृत जानकारी साझा करने की अनुमति होगी. इसके लिए दोनों देशों के कानूनों, नीतियों एवं निर्देशों के तहत जानकारी साझा की जाएगी. इस पर भारतीय नेवी तथा अमेरिकन नेवी ने हस्ताक्षर किये.
•    गैस हाइड्रेट क्षेत्र में सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन: इसका उद्देश्य दोनों देशों की भूगर्भिक घटनाओं, वितरण तथा गैस उत्पादन को समझने में सहायता मिलेगी. इस पर पट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा संयुक्त राज्य के डिपार्टमेंट ऑफ़ एनर्जी द्वारा हस्ताक्षर किये गये.
•    विमान वाहक तकनीक के विषय में मास्टर सूचना विनिमय हेतु सूचना एक्सचेंज एनेक्स (आईईए) समझौता: आईईए का उद्देश्य भारत एवं अमेरिका के मध्य विमान वाहक तकनीक की जानकारी साझा करना शामिल है. इस समझौते को रक्षा मंत्रालय एवं अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा अंतिम रूप दिया गया.
•    लॉजिस्टिक एक्सचेंज समझौता ज्ञापन: इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच संयुक्त लॉजिस्टिक सहयोग उपलब्ध कराना है. इसमें संयुक्त अभ्यास, बंदरगाह भ्रमण एवं संयुक्त एचआर अभ्यास शामिल हैं. भारत का रक्षा मंत्रालय एवं अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इस पर हस्ताक्षर किये.
•    समझौतों पर हस्ताक्षर करने के अतिरिक्त मोदी एवं ओबामा ने संयुक्त वक्तव्य जारी किया. इसके अनुसार, अमेरिका द्वारा भारत को उन्नत तकनीक प्रदान की जाएगी. इससे भारत को मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (मीटीसीआर) में प्रवेश प्राप्त करने में आसानी होगी.
•    अमेरिका द्वारा भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) के सदस्य के रूप में नामित किये जाने पर भी अमेरिका ने सहमति व्यक्त की.

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