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खनिज संसाधन मंत्रालय राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण नीति

भूवैज्ञानिकों के बीच आम सहमति बनी है कि देश बड़े पैमाने पर खनिज संसाधन से संपन्न है और ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका की तरह यहां भी भूगर्भीय पर्यावरण है। हालांकि आमतौर पर सर्वेक्षण और अन्वेषण उथले और उपरी खनिज भंडार पर केंद्रित होते हैं। गहराई में दबे खनिज के अन्वेषण में अधिक जोखिम होता है और लागत भी अधिक लगती है तथा इसके लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी तथा विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। 
उपरोक्त तथ्यों को देखते हुए सरकारी एजेंसियों द्वारा किए गए प्रयासों में विश्वभर के निजी क्षेत्र में उपलब्ध विशेषज्ञता और प्रौद्योगिकी नवाचार के साथ व्यापक सहयोग करने की आवश्यकता है। संभावित लाइसेंस और खनन पट्टे के वास्ते खनिज रियायत आवंटन में पारदर्शिता लाने के लिए एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2015 लाया गया। वर्तमान में गैर विशिष्ट पैमाइश परमिट (एनईआरपी) के लिए खनिज रियायत प्रदान की जाती है जिसमें संभावित और खनन लाइसेंस के लिए असीमित लेन-देन की अनुमति नहीं है। इस कारण निजी क्षेत्र उच्च जोखिम उठाने के लिए उत्साहित नहीं होते हैं। इसे देखते हुए अन्वेषण में निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण नीति (एनएमईपी) तैयार की गई है। 

एनएमईपी के तहत ई-नीलामी के बाद खनिज ब्लॉक की सफल बोली से राजस्व (रॉयल्टी /राज्य सरकार द्वारा एकत्रित लाभांश के तरीके से) में कुछ भागीदारी के अधिकार के साथ निजी एजेंसियां अन्वेषण कर सकेगी। राजस्व भागीदारी का भुगतान खनन लीज की पूरी अवधि के दौरान हस्तांतरण अधिकारों के साथ या तो एक मुश्त किया जाएगा या वार्षिक आधार पर होगा। 
सरकार विभिन्न प्रकार के खनिजों के अन्वेषण कार्य की मानक लागत भी तैयार करेगी ताकि अगर अन्वेषण एजेंसियां अपने खनन क्षेत्र में कोई खनिज नहीं खोज पाती हैं तो उन्हें मुआवजा दिया जा सके। अन्वेषण के जोखिम को कम करने के लिए अन्वेषण एजेंसियों के लिए यह एक अतिरिक्त प्रोत्साहन होगा। निजी खनिकों का चयन निम्नलिखित प्रतिस्पर्धी बोली की पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा किया जाएगा। 
•    सफल अन्वेषण प्रक्रिया में अधिग्रहण और प्रतिस्पर्धा के पहले के भूगर्भीय आधारभूत आंकड़ों की व्याख्या महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस संबंध में एनएमईपी निम्नलिखित प्रस्ताव देती है। 
•    प्रतिस्पर्धा से पहले आधारभूत भूगर्भीय आंकड़े सार्वजनिक रूप से तैयार किए जाएंगे और नि:शुल्क इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होंगे। 
•    पूरे देश का नक्शा तैयार करने के लिए राष्ट्रीय एयरो जीयोफिजिकल मानचित्रण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इससे गहराई में दबे खनिज भंडारण को चित्रित करने में मदद मिलेगी। 
•    राष्ट्रीय भूगर्भीय डेटा रिपोजिटरी (एनजीडीआर) का गठन किया जाएगा। जीएसआई विभिन्न केंद्रीय और राज्य सरकार की एजेंसियों खनिज तथा रियायत पाने वालों द्वारा तैयार की गई आधारभूत और खनिज अन्वेषण की जानकारी की तुलना करेगी और इसे भूस्थानिक डेटाबेस पर रखेगी। 
•    सरकार देश में खनिज अन्वेषण की चुनौती से निपटने में वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी के लिए वैज्ञानिक तथा अनुसंधान निकायों, विश्वविद्यालयों और उद्योग के साथ सहयोग और समर्थन करेगी। इसके लिए सरकार ने एक गैर लाभ की स्वायत्त निकाय/कंपनी के गठन का प्रस्ताव दिया है जिसका नाम राष्ट्रीय खनिज निर्धारण केंद्र (एनसीएमटी) होगा।
•    नीलामी योग्य संभावनाओं को व्यवस्थित करने में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्हें खनिज अन्वेषण का कार्य करना होगा और नीलामी के लिए जी-3 या जी-2 स्तर पूर्ण करना होगा। राज्यों को अन्वेषण क्षमता, प्रद्योगिकी विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचा सुविधा का निर्माण करने की आवश्यकता है। केंद्र सरकार क्षमता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास (एनएमईटी) से राज्य सरकार को सहायता प्रदान करेगी। 
•    एनएमईपी ने ऑस्ट्रेलिया के अनकवर परियोजना की तर्ज पर प्रदेश में गहराई में दबे खनिज भंडार की खोज के लिए विशेष पहल शुरू करने का प्रस्ताव किया है। पायलट परियोजना राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) तथा प्रस्तावित राष्ट्रीय खजिन निर्धारण केंद्र (एनसीएमटी) एवं जीओ साइंस ऑस्ट्रेलिया के सहयोग से शुरू की जाएगी। 
•    खनिज अन्वेषण के लिए अनुबंध ढांचा के विस्तृत शर्तें तैयार करने के लिए खान मंत्रालय ने सलाहकार के रूप में एसबीआई कैपिटल मार्केट लिमिटेड (एसबीआई कैप) का चयन किया है।  खनिज संसाधन मंत्रालय निजी एजेंसियों को इस प्रक्रिया में शामिल करने के लिए राज्य सरकार की सहायता करेगा। 

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