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मानव पूंजी सूचकांक में भारत 105वें स्थान पर

भारत विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) द्वारा जून 2016 में जारी मानव पूंजी सूचकांक में भारत 105वें स्थान पर है. डब्ल्यूईएफ की ताजा मानव पूंजी सूचकांक में कुल 130 देशों की सूची में भारत को 105वां स्थान मिला. इस सूची में फिनलैंड शीर्ष पर है.
जेनेवा की गैर सरकारी संगठन वैश्विक आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने ‘नये चैम्पियन’ नाम से कराए जाने वाले वार्षिक सम्मेलन में यह रिपोर्ट जारी की. डब्ल्यूईएफ द्वारा जारी मानव पूंजी सूचकांक इस बात संकेत है कि कौन सा देश अपने लोगों के पालन पोषण, शिक्षण-प्रशिक्षण और विकास तथा प्रतिभाओं के उपयोग में कितना आगे है.
•    डब्ल्यूईएफ की इस सूची में चीन 71वें स्थान पर और पाकिस्तान को 118वें स्थान पर है. 
•    बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका सूचकांक में काफी ऊपर हैं. 
•    सूची में बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका का स्थान भारत से ऊपर है.
•    मंच ने भारत को 105वें स्थान पर रखते हुए कहा है कि देश अपनी मानव पूंजी की संभावनाओं का सिर्फ 57 प्रतिशत ही इस्तेमाल कर पा रहा है. 
•    भारत पिछले साल इस सूचकांक में शामिल 124 देशों में 100वें स्थान पर था. 
•    मंच ने कहा है कि विभिन्न आयु वर्गों में शिक्षा के क्षेत्र में भारत की ‘उपलब्धियां बढ़ी हैं’ पर इसकी युवा साक्षरता दर अभी सिर्फ 90 प्रतिशत है.
•    इस मामले में भारत का विश्व में 103वां स्थान है और अन्य प्रमुख उभरते बाजारों से नीचे है. 
•    इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत श्रम बल में महिलाओं की भागीदार में काफी पीछे है और ऐसा आंशिक तौर पर विश्व में रोजगार के मामले में स्त्री-पुरष असमानता के मामले में अंतर अधिक होने के कारण है. 
•    सकारात्मक पक्ष यह है कि भारत को शैक्षणिक प्रणाली (39वां) की गुणवत्ता के लिहाज से बेहतर स्थान मिला है. 
•    इसके अलावा भारत कर्मचारी प्रशिक्षण में 46वें और कुशल कर्मचारियों उपलब्धता से जुड़े संकेतक में 45वें स्थान पर है.
•    इस रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित में डिग्रीधारकों की संख्या करीब 7.8 करोड़ है जबकि चीन में इनकी संख्या करीब 25 लाख है. 
•    डब्ल्यूईएफ ने कहा कि वैश्विक स्तर पर लोगों के जीवन काल में शैक्षणिक, कौशल विकास और नियुक्ति के जरिए विश्व के सिर्फ 65 प्रतिशत प्रतिभा का सबसे अच्छे तरीके से इस्तेमाल हो पाता है. 
•    इस सूचकांक में फिनलैंड, नार्वे और स्विट्जरलैंड शीर्ष तीन स्थान पर हैं जो अपनी मानव पूंजी का 85 प्रतिशत तक उपयोग करते हैं. 
•    जहां तक 55 साल से अधिक उम्र की प्रतिभाओं के इस्तेमाल का सवाल है जापान इसमंअ आगे है.

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