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ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन से अलग हुआ

ब्रिटेन ने यूरोपीय संघ से स्वयं को अलग करने के लिए 23 जून 2016 को जनमत संग्रह आयोजित कराया. 
•    इसके नतीजे में 51.89 प्रतिशत मतदाताओं ने यूरोपियन संघ (ईयू) से बाहर होने के पक्ष में वोट दिया जबकि 48.11 प्रतिशत मतदाताओं ने यूरोपीय संघ में बने रहने के पक्ष में वोट दिया.
•    मतदान के परिणाम के अनुसार, पूर्वोत्तर इंग्लैंड, वेल्स और मिडलैंड्स में अधिकतर मतदाताओं ने यूरोपीय संघ से अलग होने के लिए वोट किया जबकि लंदन, स्कॉटलैंड और नॉर्दन आयरलैंड के ज्यादातर मतदाता यूरोपीय संघ के साथ ही रहना चाहते थे.
•    वर्ष 1975 में ब्रिटेन ने यूरोपियन इकोनॉमिक कम्यूनिटी का सदस्य बने रहने के लिए मतदान किया था. यह समूह बाद में यूरोपीय संघ बना. इस जनमत संग्रह का परिणाम ब्रिटेन सरकार के लिए कानूनी तौर पर बाध्यकारी नहीं है लेकिन प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि जनता की इच्छा को स्वीकार किया जाएगा.
•    ब्रिटेन के इस निर्णय से ब्रिटेन की मुद्रा पाउंड में भारी गिरावट आई है. पाउंड में पिछले 31 सालों में ये सबसे बड़ी गिरावट है.
•    ब्रिटेन को यूरोपियन यूनियन के बजट के लिए 9 अरब डॉलर नहीं देने होंगे.
•    ब्रिटेन की सीमाओं पर बिना रोक-टोक के आवाजाही पर लगाम लगेगी.
•    फ्री वीज़ा पॉलिसी के कारण ब्रिटेन को हो रहा नुकसान भी कम होगा.
•    ब्रिटिश जीडीपी को 1 से 3 प्रतिशत नुकसान हो सकता है.
•    ब्रिटेन के लिए सिंगल मार्केट सिस्टम खत्म हो जाएगा.
•    दूसरे यूरोपीय देशों में ब्रिटेन को कारोबार से जुड़ी दिक्कतें होंगी.
•    पूरे यूरोपियन यूनियन पर ब्रिटेन का दबदबा खत्म हो जाएगा.
•    ब्रिटिश पाउंड में आई गिरावट के कारण अमेरिकी डॉलर की कीमत बढ़ेगी परिणामस्वरूप भारतीय रुपया कमज़ोर हो सकता है.
•    इससे भारत में तेल की कीमतें बढेंगी एवं पेट्रोल तथ डीज़ल के दाम बढ़ने से बाकी चीज़े भी महँगी हो जायेंगी.
•    इससे वे 800 भारतीय कम्पनियां प्रभावित होगीं जिन्हें यूरोपियन यूनियन को छोड़कर अमेरिकी डॉलर पर निर्भर होना पड़ेगा.
•    हालांकि इससे भारत को लाभ भी हुआ होगा जैसे भारत अब ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार को बढ़ावा दे सकेगा. 
•    इस बीच आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि विश्व के अन्य केन्द्रीय बैंकों की तुलना में भारतीय रुपया स्थिर रहेगा.

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