रिजर्व बैंक एफडीआई संबंधी जानकारी आईबी, रॉ के साथ साझा करेगा

भारतीय रिजर्व बैंक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) संबंधी सूचनाएं देश की खुफिया एजेंसियों आईबी और रॉ के साथ साझा करेगा।
• इसका मकसद देश में कालाधन आने से रोकना है।
• आर्थिक अपराधों पर अंकुश के लिए राजस्व सचिव की अगुवाई वाले एक सरकारी समूह की हालिया बैठक में इस बारे में फैसला किया गया।
• ‘खुफिया प्रणाली पर कार्यसमूह’ की बैठक में खुफिया ब्यूरो (आईबी) के प्रतिनिधियों की राय थी कि सूचना का होना महत्वपूर्ण है। बैठक में यह फैसला किया गया कि रिजर्व बैंक भारत में वास्तव में आने वाले एफडीआई के बारे में सूचनाओं को आईबी और कैबिनेट सचिवालय से साझा करेगा।
• यह कदम इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि सरकार को उम्मीद है कि व्यापार को उदार बनाने तथा कारोबार की स्थिति सुगम करने के कदमों से देश में विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ेगा।
• एफडीआई या तो स्वत: मंजूर मार्ग (जिसका रिकार्ड रिजर्व बैंक के पास होता है) या आर्थिक मामलों के विभाग के तहत अंतर मंत्रालयी निकाय विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) के जरिये आता है।
• देश में निवेश आने की जानकारी सिर्फ रिजर्व बैंक के पास होती है। रिजर्व बैंक इस सूचना को अपनी वेबसाइट पर डाल सकता है .
• संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं निवेश सम्मेलन की एक रिपोर्ट के अनुसार 2015 में भारत में एफडीआई का प्रवाह लगभग दोगुना होकर 59 अरब डालर पर पहुंच गया है।
• विदेशी निवेश भारत के लिए इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि उसे 2012-13 से 2016-17 के दौरान करीब 1,000 अरब डालर के निवेश की जरूरत है।





