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किशोर न्याय अधिनियम के मसौदा मॉडल नियमों का विमोचन

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मौजूदा नियमों को निरस्त करने के लिए मसौदा मॉडल नियमों का विमोचन किया।
•    मसौदा नियमों में बच्चों की विकास जरूरतों और बच्चों के अनुकूल प्रक्रियाओं का ख्याल रखा गया है। 
•    मसौदा नियमों के अलावा एक व्यापक फार्म भी तैयार किया गया है ताकि मानकीकरण और विहित प्रक्रिया को सरल किया जा सके।
•    नियमों के तहत बच्चों के घर, खुले आश्रय और प्रेक्षण और विशेष घरों के माध्यम से बच्चों के पुनर्वास और पुन: एकीकरण का भी प्रावधान है।
•    नियम एक बहु अनुशासनिक समिति द्वारा तय किए गए हैं जिसमें अध्यक्ष के तौर पर एक वरिष्ठ न्यायाधीश और सदस्यों के रुप में वरिष्ठ अधिवक्ताओं को शामिल किया गया है। 
•    किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समिति के सदस्य और मानसिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इसमें शामिल हैं।
•    जब किसी बच्चें द्वारा कोई कानून-विरोधी या समाज विरोधी कार्य किया जाता है तो उसे किशोर अपराध या बाल अपराध कहते हैं। 
•    कानूनी दृष्टिकोण से बाल अपराध 8 वर्ष से अधिक तथा 16 वर्ष से कम आया के बालक द्वारा किया गया कानूनी विरोधी कार्य है जिसे कानूनी कार्यवाही के लिये बाल न्यायालय के समक्ष उपस्थित किया जाता है। 
•    भारत में बाल न्याय अधिनियम 1986 (संशोधित 2000) के अनुसर 16 वर्ष तक की आयु के लड़कों एवं 18 वर्ष तक की आयु की लड़कियों के अपराध करने पर बाल अपराधी की श्रेणी में सम्मिलित किया गया है। 

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